
जमशेदपुर : गले में बार-बार दर्द, खराश और निगलने में परेशानी को अक्सर लोग सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर टॉन्सिल में बार-बार सूजन आ रही है तो सचेत होने की जरूरत है। लगातार संक्रमण की समस्या न केवल खानपान को प्रभावित करती है, बल्कि कई बार नींद और सांस लेने में भी परेशानी पैदा कर सकती है। बच्चों से लेकर बड़ों तक में यह समस्या देखने को मिलती है। ऐसे में समय पर बीमारी की पहचान और सही उपचार जरूरी है।
संक्रमण के कारण बार-बार बढ़ सकते हैं टॉन्सिल
टॉन्सिल गले के दोनों तरफ मौजूद छोटे ऊतक होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा हैं। इनका काम संक्रमण से बचाव में मदद करना है। हालांकि, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण इनमें सूजन आ सकती है।
जमशेदपुर के जाने-माने फिजिशियन डॉ. बलराम झा के अनुसार, गले में बार-बार संक्रमण होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बैक्टीरियल इन्फेक्शन, वायरल संक्रमण, एलर्जी, धूल-धुआं और प्रदूषण प्रमुख हैं। इसके अलावा पेट का एसिड गले तक पहुंचने यानी एसिड रिफ्लक्स की समस्या भी गले में जलन और खराश पैदा कर सकती है।
इन लक्षणों से करें पहचान
टॉन्सिल में संक्रमण होने पर शुरुआत में गले में दर्द और खराश महसूस होती है। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
गले में सूजन और दर्द होना।
खाना या पानी निगलने में परेशानी।
टॉन्सिल पर लालिमा या सफेद धब्बे दिखना।
बुखार, सिरदर्द और शरीर में थकान।
बच्चों में भूख कम लगना और चिड़चिड़ापन।
यदि इन लक्षणों की समस्या बार-बार सामने आ रही है तो ईएनटी विशेषज्ञ या फिजिशियन से जांच करानी चाहिए।
घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत
हल्के संक्रमण में कुछ सावधानियां और घरेलू उपाय राहत देने में मदद कर सकते हैं। गुनगुने नमक के पानी से गरारे करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और नरम भोजन करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा गर्म, तीखे और खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
डॉ. बलराम झा के अनुसार, संक्रमण के कारण का पता लगाना जरूरी है। वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का उपचार अलग-अलग हो सकता है। बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक दे सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन नहीं करना चाहिए।
कब जरूरी हो जाती है सर्जरी?
अगर साल में कई बार टॉन्सिल का संक्रमण हो रहा है और दवाओं से स्थायी राहत नहीं मिल रही है तो डॉक्टर टॉन्सिल निकालने की सर्जरी यानी टॉन्सिलेक्टॉमी पर विचार कर सकते हैं।
आमतौर पर एक साल में सात या अधिक बार संक्रमण,
लगातार दो वर्षों तक हर साल पांच या अधिक बार संक्रमण अथवा लगातार तीन वर्षों तक हर साल तीन या अधिक बार संक्रमण होने पर सर्जरी की जरूरत का मूल्यांकन किया जाता है। इसके अलावा टॉन्सिल बढ़ने से नींद में सांस रुकने या निगलने में परेशानी होने पर भी सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
टॉन्सिल के संक्रमण से बचने के लिए हाथों की साफ-सफाई रखें। संक्रमित व्यक्ति के साथ गिलास, चम्मच और तौलिया साझा न करें। धूम्रपान के धुएं और प्रदूषण से बचें। पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें।
ध्यान रखें : यदि गले में एक तरफ अत्यधिक सूजन हो, लार निगलने में परेशानी हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचें। बार-बार टॉन्सिल बढ़ने की समस्या को सामान्य मानकर टालना ठीक नहीं है।

