सेंट्रल डेस्क: तमिलनाडु सरकार ने अडानी समूह को बड़ा झटका दिया है। राज्य की डीएमके सरकार ने अडानी समूह का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया है। तमिलनाडु सरकार ने स्मार्ट मीटर की ख़रीद के लिए समूह के ग्लोबल टेंडर को रद्द कर दिया है। स्मार्ट मीटर के इस टेंडर के लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने सबसे कम बोली लगाई थी।
क्या बताया टेंडर रद्द करने का कारण
तमिलनाडु सरकार के तमिलनाडु उत्पादन एवं वितरण निगम (Tangedco) विभाग की ओर से यह टेंडर किया गया है। टेंडर को रद्द किए जाने का कारण निगम की ओर से यह बताया गया कि AESL ने तमिलनाडु स्क्रैप स्मार्ट मीटर टेंडर के लिए लागत अधिक बताई थी।
19000 करोड़ का पास होना था फंड
यह टेंडर चेन्नई, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू समेत आठ जिलों को कवर करता है और ये इस तरह के चार टेंडर पैकेजों में से एक था। इस पैकेज के लिए केंद्र सरकार की ओर से 19,000 करोड़ रुपये का फंड पास किया जाना था। इस अकेले पैकेज में पुनरोद्धार वितरण क्षेत्र योजना के तहत 82 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर्स लगाए जाने थे। इस योजना के तहत राज्य में सभी बिजली कनेक्शन, जिसमें कृषि कनेक्शन शामिल नहीं है, के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना थी।
प्रशासनिक कारणों से भी टेंडर रद्द करने की चर्चा
तमिलनाडु उत्पादन एवं वितरण निगम के अधिकारियों ने बताया कि AESL ने टेंडर हासिल करने के लिए जो कीमत लगाई थीं। सरकार के लिए लागत इतनी अधिक थी कि बातचीत के बाद भी स्वीकार किये जाने लायक नहीं था। Tangedco के सूत्रों ने बताया कि अगस्त 2023 में जारी सभी चार टेंडर प्रशासनिक कारणों से रद्द कर दिए गए हैं, इनमें बाक़ी ज़िलों को कवर करने वाले शेष तीन पैकेज भी शामिल हैं। अब सरकार बहुत जल्द फिर से टेंडर जारी करेगी।
महाराष्ट्र-बिहार में भी चल रहा अडानी का काम
बता दें, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड पहले से ही महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में इसी तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, लेकिन वहां मीटर लगाए जाने की कीमत सस्ती थी। ऐसे में अडानी समूह की बोली अन्य जगहों पर लगाई गई 120 रुपये प्रति मीटर प्रति महीने की बोली से काफ़ी अधिक थी।
तमिलनाडु में 30 मिलियन से अधिक लगेंगे स्मार्ट मीटर
वर्तमान में, तमिलनाडु में 30 मिलियन से अधिक स्मार्ट मीटर्स लगाए जाने की योजना है। खबरों के अनुसार, स्मार्ट मीटर्स लगाए जाने से तमिलनाडु के कुल तकनीकी और वाणिज्यिक घाटे में 16% से 10% तक की कमी की उम्मीद है। इसके साथ ही, बिलिंग में भी मदद मिलेगी और ज़्यादा अच्छी टैरिफ योजना बनाई जा सकेगी।
अमेरिका में लगे थे रिश्वतखोरी के आरोप
बता दें कि एक महीने पहले ही अमेरिका में अडानी ग्रुप पर रिश्वत देने के आरोपों लगे थे, जिसके के बाद ही एमके स्टालिन सरकार की ओर से यह निर्णय लिया गया। हालांकि, अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को निराधार बताया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी INDIA ब्लॉक ने अडानी समूह पर अपने हमले बढ़ा दिए है। DMK भी INDIA गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा है, ऐसे में राजनीतिक हलकों में टेंडर का रद्द किया जाना अडानी समूह पर लगे आरोपों के कारण भी माना जा रहा है।

