
Jamshedpur : टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने खनन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और भूमि पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए हाइड्रोसीडिंग तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। इस पहल के तहत अब तक खदानों, नर्सरी और माइन डंप सहित 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में हाइड्रोसीडिंग की जा चुकी है। कंपनी की इस पहल से खनन के बाद प्रभावित जमीन पर तेजी से हरियाली विकसित करने में मदद मिल रही है।
हाइड्रोसीडिंग तकनीक के माध्यम से बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक सामग्री के मिश्रण का छिड़काव किया जाता है। इस तकनीक के तहत इस्तेमाल की जा रही आधुनिक मशीन दूर तक मिश्रण का छिड़काव करने में सक्षम है। यह 80 मीटर तक फैली डंप की ढलानों को प्रभावी ढंग से कवर कर सकती है। इससे उन दुर्गम क्षेत्रों तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है, जहां पारंपरिक तरीकों से काम करना चुनौतीपूर्ण होता है।
इस पहल के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। खदानों की ढलानों पर हरियाली दिखाई देने लगी है और बड़े क्षेत्र में बेहतर तरीके से छिड़काव किया जा रहा है। इससे भूमि पुनर्वास की प्रक्रिया को गति मिलने के साथ ही पर्यावरणीय सुधार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
हाइड्रोसीडिंग तकनीक से कम समय में हरियाली विकसित करने में मदद मिलती है। इससे मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और आसपास के पर्यावरण में सुधार लाने में भी सहायता मिलती है।
टाटा स्टील की यह पहल आधुनिक तकनीक अपनाने, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खनन कार्यों के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। खनन के बाद जमीन को दोबारा उपयोग के योग्य बनाने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में हाइड्रोसीडिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह पहल सतत खनन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति कंपनी के प्रयासों को और मजबूत करती है।

