
चक्रधरपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल मुख्यालय स्थित चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर बोतलबंद पीने के पानी की भारी किल्लत से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्रेन से उतरने के बाद यात्री पानी की तलाश में स्टॉलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन पर आने-जाने वाले यात्रियों को हो रही है, जहां बोतलबंद पानी नहीं मिलने से वे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
मंडल मुख्यालय जैसे बड़े स्टेशन पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा का संकट रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्टेशन पर बोतलबंद पानी नहीं होने से यात्रियों का गला सूख रहा है, लेकिन सुरक्षित पेयजल का कोई इंतजाम नजर नहीं आ रहा।
जानकारी के मुताबिक, रेलवे ने गुणवत्ता में खामी पाए जाने के बाद बोतलबंद पानी के दो लोकल ब्रांड अटलांटिक आइस और आर्क्लिस की बिक्री पर रोक लगा दी है। 16 अक्टूबर को मंडल के एसीएम द्वारा जारी पत्र में मौजूद ब्रांड के पानी के स्टॉक को नष्ट करने का आदेश भी दिया गया था। यात्रियों की सेहत के लिहाज से यह कदम जरूरी है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि प्रतिबंध के बाद सुरक्षित पानी की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
फिलहाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर वॉटर वेंडिंग मशीन से पानी मिल रहा है, लेकिन तीन प्लेटफॉर्म वाले स्टेशन के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है। खासकर लंबी दूरी के यात्रियों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेनों के लेट होने पर यात्रियों की परेशानी और भी बढ़ जाती है। स्टॉल संचालकों का कहना है कि रेलवे के निर्देश के बाद उनके पास बोतलबंद पानी उपलब्ध नहीं है, ऐसे में पानी मांगने आ रहे यात्रियों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
चक्रधरपुर रेल मंडल के इस महत्वपूर्ण स्टेशन पर पानी की अनुपलब्धता ने यात्री सुविधाओं की पोल खोल दी है। अब बड़ा सवाल है कि रेलवे रेल नीर या अन्य अधिकृत ब्रांड की सप्लाई कब तक सुनिश्चित करेगा और सभी प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाएगा। खराब पानी की बिक्री पर रोक जरूरी है, लेकिन यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना भी रेलवे की ही जिम्मेदारी है।
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