
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन क्षेत्र में हाथियों की सिलसिलेवार हो रही अप्राकृतिक मौतों ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। लगातार आ रही दुखद खबरों से पर्यावरणविदों, स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच भारी निराशा और नाराजगी देखी जा रही है। ताजा मामला है, पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड के दुरुला टोला, तारोबपी और होचाउली गांव के सीमावर्ती इलाके में विद्युत तार की चपेट में आने से एक हाथी की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस त्रासदी के कुछ ही समय बाद एक अन्य हाथी की मौत की सूचना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। यद्यपि वन विभाग ने इस नवीनतम घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
एक के बाद एक हो रही इन मौतों से वन विभाग की मुस्तैदी और सुरक्षा प्रबंधों की पोल खुलती नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वन विभाग की शिथिलता और ढुलमुल रवैये के कारण यह संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, जंगलों से सटे इलाकों में नीचे लटकते हाई-टेंशन बिजली के तार और अवैध रूप से खींचे गए विद्युत कनेक्शन वन्यजीवों के लिए काल बन चुके हैं। जब हाथी आहार और जल की तलाश में बस्तियों का रुख करते हैं, तो वे इन असुरक्षित तारों की चपेट में आ जाते हैं। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी न तो तारों की ऊंचाई बढ़ाई गई और न ही सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम किए गए।
गांवों में भय का माहौल, रतजगा करने को मजबूर ग्रामीण
हाथियों की मौतों और उनके भड़कते झुंडों की आहट से आसपास के गांवों में दहशत व्याप्त है। अनहोनी के डर से ग्रामीण रात में अपने घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। हाथियों के संभावित हमले से बचाव के लिए ग्रामीणों को पूरी-पूरी रात जागकर पहरा देना पड़ रहा है।
संयुक्त कार्ययोजना और उच्चस्तरीय जांच की मांग
पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि सारंडा की पहचान माने जाने वाले हाथियों को बचाना है, तो वन विभाग, बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर एक ठोस रणनीति पर काम करना होगा। इसके तहत जंगलों के भीतर भोजन-पानी का प्रबंध, झूलते तारों को दुरुस्त करना, रात्रिकालीन गश्त तेज करना और ग्रामीणों को सतर्क करना बेहद अनिवार्य है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि हाल की सभी घटनाओं की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, मौतों के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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