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West Singhbhum News : एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो का 18 प्रखंडों में महाधरना, राष्ट्रपति को भेजा मांग पत्र

चक्रधरपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित धरना की अध्यक्षता ताराकांत सिजुई ने की

by Rajeshwar Pandey
West Singhbhum News
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Chaibasa : केंद्र सरकार के प्रस्तावित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से पश्चिमी सिंहभूम जिले के 18 प्रखंड मुख्यालयों में एक दिवसीय महाधरना आयोजित किया गया। धरना के बाद सभी जगह प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र भेजा गया।

चक्रधरपुर में विधायक सुखराम उरांव ने केंद्र पर साधा निशाना

चक्रधरपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित धरना की अध्यक्षता ताराकांत सिजुई ने की। इसमें विधायक सुखराम उरांव मुख्य रूप से शामिल हुए।

विधायक ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ राज्य के विकास और यहां के लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र का यह संशोधन राज्य के अधिकारों और वित्तीय हितों पर हमला है। धरना में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विधेयक वापस लेने की मांग की।

इस अवसर पर चंपाई बोयपाई, दिनेश जेना, प्रदीप महतो, शकील अंसारी, पीरु हेंब्रम, शमरेश सिंह, मदन बोदरा, मोहम्मद हुसैन, राजेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

रैली निकाल कर धरना प्रदर्शन में शामिल होने जाते विधायक जगत मांझी

मंझारी में बोले विधायक निरल पूर्ति – खनिज हमारा तो राजस्व पर हक दिल्ली का क्यों?

मझगांव विधानसभा क्षेत्र के तांतनगर, मंझारी, कुमारडूंगी और मझगांव प्रखंडों में भी धरना दिया गया। मंझारी में विधायक निरल पूर्ति ने कहा कि खनिज वहन भूमि उपकर और एमएमडीआर संशोधन को केवल कर का विषय मानकर नहीं देखा जा सकता। झारखंड को खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरण क्षति और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने राज्यों को खनिज पर कर लगाने की शक्ति दी थी। इसी आधार पर झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट 2024 बनाया। कहा कि प्रस्तावित केंद्रीय संशोधन में राज्यों द्वारा कर लगाने को केंद्र की शर्तों के अधीन करने का प्रावधान है, जो गलत है।

झामुमो नेताओं के साथ धरना प्रदर्शन में शामिल विधायक निरल पूर्ति

निरल पूर्ति ने कहा कि यह उपकर रॉयल्टी नहीं है, बल्कि खनिज वाली भूमि पर उपकर है। इससे राज्य को 2024-25 में 1,379 करोड़, 2025-26 में 7,488 करोड़ और 2026-27 में अनुमानित 13,215 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना में खर्च हो रहा है। उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की।

सोनुवा में गरजे विधायक जगत माझी

मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के सोनुवा प्रखंड मुख्यालय में विधायक जगत माझी के नेतृत्व में धरना दिया गया। कार्यकर्ता वन विश्रामागार से जुलूस निकालकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे और केंद्र के खिलाफ नारेबाजी की।

जगत माझी ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था में हस्तक्षेप बंद करे। जल, जंगल और जमीन झारखंड की पहचान है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल, जंगल, जमीन लूटने की कोशिश हुई तो सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। फिलहाल लोकतांत्रिक तरीके से विरोध हो रहा है, लेकिन विधेयक वापस नहीं लिया गया तो सड़क और रेल चक्का जाम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस संशोधन से मंइयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, सर्वजन पेंशन और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं पर असर पड़ेगा। धरने में विनय प्रधान, सागर महतो, हेमचंद्र महतो, हरिनारायण दास, संजय जामुदा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।

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