
लोहरदगा : झारखंड के लोहरदगा स्थित हिंडालको के अनलोडिंग परिसर में सोमवार को ट्रक अनलोडर मजदूर संघ ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल उरांव ने की, और इसमें मुख्य अतिथि के रूप में लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत उपस्थित रहे।
सांसद सुखदेव भगत ने मजदूरों के साथ खड़े रहने का वादा करते हुए हिंडालको के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि हिंडालको कंपनी ने दोहरे मापदंड अपनाए हैं और मजदूरों के शोषण को बढ़ावा दिया है। सांसद ने यह भी कहा कि हिंडालको कंपनी ने पिछले दो महीनों से बिना किसी सूचना के अनलोडिंग स्टेशन को बंद कर दिया है, जिससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
मजदूरों की हालत हुई बदतर, सांसद ने किया कड़ा विरोध
मजदूरों के लिए स्थिति बेहद कठिन हो गई है। कई मजदूरों के पास अपने बच्चों की फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं। सांसद ने कहा, “भारत के निर्माण में मजदूरों का योगदान अत्यधिक है, और हिंडालको कंपनी उनके साथ अन्याय कर रही है। यह न केवल गलत है, बल्कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण भी है।”
सांसद ने जोर देकर कहा कि अगर कंपनी ने ट्रकों के परिचालन को प्रदूषण की वजह से बंद किया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि रोपवे से भी प्रदूषण नहीं होगा। उनका कहना था कि कंपनी को मजदूरों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, न कि उनके रोजगार को समाप्त करना चाहिए था।
रोपवे हादसा और प्रशासन की लापरवाही
सांसद ने 10 दिन पहले हुए रोपवे के हादसे का भी निरीक्षण किया, जिसमें 22 ट्रॉली गिर गई थीं। सांसद ने कहा कि लोहरदगा जिलेवासी सौभाग्यशाली हैं कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह घटना हिंडालको प्रशासन की लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने कहा कि इस हादसे का दोषी हिंडालको कंपनी और जिला प्रशासन हैं, जिन्होंने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
सांसद ने अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिए कि जिला प्रशासन और हिंडालको कंपनी के बीच समन्वय स्थापित कर रोपवे को तभी चालू किया जाए जब पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएं।
मजदूरों ने चेतावनी दी, आंदोलन की अगली योजना
धरना प्रदर्शन के दौरान, मजदूरों ने कहा कि अगर हिंडालको कंपनी उन्हें रोजगार नहीं देती है, तो वे अगला आंदोलन हिंडालको मुख्यालय का घेराव करने और चक्का जाम करने की योजना बनाएंगे। इसके साथ ही वे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। इस दौरान अनेक मजदूर और स्थानीय लोग उपस्थित थे। उन्होंने हिंडालको के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा।
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