हेल्थ डेस्क, जमशेदपुर : ठंड की शुरुआत हो चुकी है। इस बदलते मौसम में लोगों को विशेष सावधान होने की जरूरत होती है क्योंकि इस मौसम में स्ट्रोक (World Stroke Day 2023) के मामले बढ़ जाते हैं। उक्त बातें जमशेदपुर के जाने-माने न्यूरो फिजिशियन डॉ. एमएन सिंह ने कहीं।
विश्व ब्रेन स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day 2023) के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. एमएन सिंह ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले युवाओं में भी बढ़ा है। इसके पांच मुख्य कारण है, जिसमें उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और मधुमेह शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चिंता का विषय यह है कि इन रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर, इसे नहीं रोका गया तो आने वासे समय क्या होगा, यह किसी से छिपा नहीं है।
भारत में मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है स्ट्रोक
डॉ. एमएन सिंह कहते हैं कि भारत में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। अब स्थिति यह हो गई है कि किसी को भी स्ट्रोक आ सकता है। इसका मुख्य कारण लाइफ स्टाइल बन रहा है। खराब जीवन शैली की वजह से ही मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज सहित अन्य बीमारी बढ़ रही है, जो स्ट्रोक से सीधे जुड़ा हुआ है। डॉ. एमएन सिंह कहते हैं कि भारत में हर साल भारत में हर साल 18 लाख से अधिक लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं। वहीं, चार मिनट में स्ट्रोक से एक मरीज की मौत होती है।
29 अक्टूबर को मनाया जाता विश्व स्ट्रोक दिवस
स्ट्रोक एक खतरनाक बीमारी है। अगर किसी व्यक्ति को स्ट्रोक(World Stroke Day 2023) आ जाए तो उसे तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है। इसमें देरी होने से मरीज की मौत तक हो जाती है। ऐसे में हर साल लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day 2023) मनाया जाता है।
स्ट्रोक क्या है?
न्यूरो फिजिशियन डॉ. एमएन सिंह कहते हैं कि जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम या पूरी तरह से रुक जाता है तो उस स्थिति में स्ट्रोक आता है। ऐसे में हमें इस अवस्था से बचना चाहिए। दरअसल, रक्त का प्रवाह रुकने से मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व भी नहीं जा पाता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं मिनटों में मर जाती हैं। इस दौरान मस्तिष्क में ब्लीडिंग भी शुरू हो जाता है। इस कारण से भी स्ट्रोक होता है।
स्ट्रोक के होते हैं दो स्तर
स्ट्रोक के दो स्तर होते हैं, जिसका पहचान करना जरूरी होता है। पहला मिनिस्ट्रोक और दूसरा स्ट्रोक होता है। मिनी स्ट्रोक तब होता है, जब क्षति केवल कुछ मिनटों तक रहती है और मस्तिष्क पर स्थायी प्रभाव नहीं छोड़ती है। इस दौरान मरीज को ज्यादा नुकसान तो नहीं होता लेकिन यह चेतावनी है।
डॉ. एमएन सिंह कहते हैं कि इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस अवस्था में तत्काल किसी न्यूरो फिजिशियन से संपर्क करना चाहिए। ताकि दोबारा स्ट्रोक आने से बचा जा सकें।
मिनी स्ट्रोक के लक्षण
– चेहरे के एक साइड में पैरालिसिस जैसा महसूस होना।
– कुछ देर के लिए अंधापन जैसी समस्या।
– बोलने में परेशानी होना।
– हाथों में सुन्नता
– समझने में कठिनाई होना।
– चक्कर आना।
इस कारण से बढ़ रहे स्ट्रोक के मामले
– उच्च रक्तचाप को नियंत्रित नहीं करना।
– तंबाकू का सेवन अधिक करना।
– कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना।
– शरीर का वजन लगातार बढ़ना।
– मधुमेह को नियंत्रित रखना।
– जेनेटिक
स्ट्रोक के लक्षण
– चेहरे, हाथ या पैर अचानक से सुन्न हो जाते है।
– कमजोरी खासकर शरीर के एक तरफ।
– अचानक से भ्रम, बोलने में परेशानी या भाषण समझने में परेशानी।
– एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी।
– चलने में परेशानी होना। चक्कर आना।
– बिना किसी कारण के सिर दर्द तेज होना।
– ऐसी परिस्थिति में तत्काल किसी चिकित्सक से संपर्क करने चाहिए। ताकि समय बीमारी की पहचान कर उसका इलाज समय पर शुरू हो सकें।
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