स्पेशल डेस्क : रेमंड परिवार के बीच से एक बार फिर दुखद समाचार सामने आ रहा है। रेमंड के मालिक की शादी टूट गई है। पत्नी से अलग होने का ऐलान रेमंड के एमडी और चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया पर किया है। 32 सालों के बाद यह रिश्ता टूटा है। उन्होंने इस बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर जानकारी साझा की है। परिवार के लिए यह बड़ी त्रासदी का वक्त बन गया है। यह पहली बार नहीं है जब परिवार में विवाद सामना आया है। इसके पहले भी गौतम सिंघानिया और पिता विजयपत सिंघानिया के रिश्तों में विवाद की खबरें सामने आ चुकी हैं।
एक्स पर दी जानकारी:
भारत के अरबपति कारोबारी रेमंड के एमडी और चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने एक्स पर जानकारी दी कि उनके और उनकी पत्नी नवाज मोदी के रिश्ते अब अलग हो चुके हैं। जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा, ‘यह दिवाली पहले जैसी बिल्कुल भी नहीं होने वाली है। यहां से मैं और नवाज अलग-अलग रास्ते अपनाएंगे।’ आगे उन्होंने लिखा- ‘एक कपल के तौर पर 32 साल साथ रहना, माता-पिता बनना और हमेशा एक-दूसरे की ताकत बने रहने का संकल्प और भरोसा हमारी जिंदगी में कई खूबसूरत बदलाव लाए हैं।’ उन्होंने आगे यह भी कहा की भले ही अब उनके रास्ते अलग होंगे लेकिन हम अपने बच्चों निहारिका और निसा के लिए बेहतरीन करेंगे।
बीते दिनों गौतम सिंघानिया ने अपनी शादी के बारे में जिक्र करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था कि पारसी लड़की से शादी करना उनके लिए बहुत मुश्किल था क्योंकि कल्चरली दोनों बहुत अलग थे जिसके कारण उन्हें बहुत एडजेस्टमेंट करने पड़े थे। आपको बता दें कि उनकी पत्नी नवाज मोदी पारसी हैं।
पिता से विवाद में फंसे थे गौतम:
गौतम का पहले भी अपने पिता से संपत्ति को लेकर विवाद हुआ था। उनके और पिता के बीच एक फ्लैट को लेकर मतभेद थे, जो बाद में कोर्ट तक पहुंच गया था। उसके अलावा, गौतम पर यह आरोप भी लगे थे कि उन्होंने अपने पिता को घर से निकालने की कोशिश की थी, जिसकी वजह से पिता-बेटे के रिश्ते बिगड़ गए थे।
रेमंड की कहानी:
एक वक्त था जब शादियों के कपड़ों के बारे में सोचते ही सबसे पहले रेमंड का खयाल सामने आता था। क्या आपको पता है कि रेमंड की शुरुआत कब और कैसे शुरू हुई? दरअसल, 1900 में महाराष्ट्र के ठाणे में Raymond की शुरुआत वुलन मिल के रूप में हुई थी, जिसे वाडिया मिल कहा जाता था। यहां पर सेना के लिए यूनिफार्म बनाया जाता था। 1925 में, मुंबई के उद्योगपतियों ने इस मिल को खरीदा।
फिर, साल 1940 में, कैलाशपत सिंघानिया ने इसे खरीद लिया और उसका नाम बदलकर रेमंड मिल रखा गया। यहां पर वुलन के सस्ते कपड़े बनते थे। बाद में, साल 1960 में, इस मिल में विदेशी मशीनों से कपड़े तैयार किए जाने लगे। कंपनी धीरे-धीरे प्रसिद्ध होने लगी।
इसका श्रेय कंपनी की टैगलाइन को भी जाता है, जिसने ‘द कंप्लीट मैन’ और ‘फील्स लाइक हैवन’ जैसी टैगलाइन से लोगों का पसंदीदा ब्रांड बन गया। अपने उद्योगों को बढ़ाते हुए इन्होंने कपड़ा, इंजीनियरिंग, विमानन और रियल एस्टेट में भी हाथ जमा लिया है। आपको बता दें कि इस कंपनी की आय 2022 में करीबन ₹50,000 करोड़ थी।

