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सबसे प्रदूषित राजधानी में फिर दिल्ली टॉप पर, बिहार के इस शहर का भी जुड़ा नाम

by Rakesh Pandey
World Air Quality Report
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सेंट्रल डेस्क। World Air Quality Report: प्रदूषण की बात हो और उसमें दिल्ली के नाम का जिक्र ना हो ऐसा तो फिलहाल मुमकिन होता नहीं दिख रहा है। दुनियाभर के प्रदूषण पर ताजा रिपोर्ट आई है, जिसमें सबसे प्रदूषित राजधानी की लिस्ट में एक बार फिर दिल्ली पहले नंबर है। वहीं बिहार का बेगूसराय दुनिया का सबसे प्रदूषित महानगरीय क्षेत्र रहा।

IQAir Report- लगातार चार बार से सबसे प्रदूषित राजधानी है दिल्ली

साल 2022 में दिल्ली का PM2.5 स्तर 2022 में 89.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो साल 2023 में बिगड़कर 92.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। साल 2018 से लगातार 4 बार दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का दर्जा मिला है, जो दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।

IQ Air Report- भारत तीसरा सबसे प्रदूषित देश

स्विस संगठन IQAir की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली सबसे ज्यादा प्रदूषित है तो वहीं भारत प्रदूषित देशों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। भारत की औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

IQ Air Report- किस देश में कितना PM2.5

पहले नंबर पर बांग्लादेश है, जिसकी PM2.5 सांद्रता 79.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पाकिस्तान 73.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर PM2.5 सांद्रता के साथ प्रदूषित देशों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। वहीं तीसरे पर भारत है जिसकी औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

134 देश हुए शामिल

साल 2022 में विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में 131 देशों को शामिल किया गया था, जिसमें 7,323 स्थानों का डेटा लिया गया। वहीं साल 2023 में इसमें देशों की संख्या बढ़ गई। साल 2023 की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में 134 देशों को शामिल किया गया। वहीं 7,812 स्थानों का डेटा लिया गया।

क्या होता है PM 2.5?

पीएम (PM) यानी पार्टिकुलेट मेटर जो वायु में मौजूद छोटे कण होते हैं, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का करके पता लगाया जा सकता है। PM 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को कहते हैं, जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3% है।

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