
रांची: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट द्वारा सचिवालय सेवा की प्रोन्नति नियमावली में किए गए संशोधन को वापस नहीं लेने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो सचिवालय का संपूर्ण कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। आंदोलन की अगली रणनीति संघ की आमसभा में तय होगी।
शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन परिसर में सचिवालय सेवा संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्मिक विभाग एवं कार्मिक सचिव के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कार्मिक सचिव के कक्ष का घेराव किया और धरने पर बैठ गए। संघ का आरोप है कि कार्मिक विभाग लगातार ऐसे फैसले ले रहा है, जो सचिवालय सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं।
संघ का कहना है कि झारखंड कैबिनेट ने प्रोन्नति नियमावली (संकल्प संख्या-3286, दिनांक 4 अप्रैल 2014) में संशोधन कर सचिवालय सेवा के अधिकारियों के कैरियर पर प्रतिकूल असर डालने वाला निर्णय लिया है। संशोधित नियमावली से पदोन्नति की व्यवस्था प्रभावित होगी और सचिवालय सेवा के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसलिए संघ की मुख्य मांग है कि संशोधित नियमावली को तत्काल निरस्त कर वर्ष 2014 की पूर्व व्यवस्था को यथावत लागू किया जाए। प्रदर्शन के दौरान संघ के प्रतिनिधिमंडल को मुख्य सचिव से वार्ता के लिए बुलाए जाने की सूचना मिली। प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मिलने पहुंचा और करीब आधे घंटे तक इंतजार भी किया, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी। इस बीच धरनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों को हटाने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाते हुए संघ ने वार्ता से इनकार कर दिया। संघ का कहना है कि बातचीत के नाम पर केवल आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी।
सचिवालय सेवा संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार ने कहा कि सरकार का यह फैसला सचिवालय सेवा के अधिकारियों के कैरियर हितों के खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने संशोधित प्रोन्नति नियमावली वापस नहीं ली तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और उग्र होगा। जरूरत पड़ने पर सचिवालय का पूरा कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

