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महाराष्ट्र CM फडणवीस ने की भुजबल के लिए भविष्यवाणी, डिप्टी सीएम पवार ने इसे एनसीपी का ‘आंतरिक मामला’ बताया

अजित पवार को भुजबल साहब की फिक्र है। अजीत दादा चाहते हैं कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी बने, इसलिए भुजबल साहब को राष्ट्रीय मंच पर भेजने पर चर्चा हो रही है।

by Reeta Rai Sagar
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मुंबई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को ‘राष्ट्रीय मंच’ पर भेजने की योजना का संकेत दिया है। खबर है कि पार्टी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार चाहते हैं कि एनसीपी एक राष्ट्रीय पार्टी बने। बीते कई दिनों से मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक पूर्व मंत्री छगन भुजबल नई महायुति सरकार में शामिल नहीं किए जाने से नाखुश हैं।

छगन भुजबल और फडणवीस की मुंबई में हुई थी मुलाकात

महाराष्ट्र सीएम ने कहा कि भुजबल मुझसे मुंबई में मिले थे। उन्होंने पहले ही उन कारणों के बारे में बता दिया है जिनके लिए यात्रा निर्धारित की गई थी। वह हमारे नेता हैं। अजित पवार को भुजबल साहब की फिक्र है। अजीत दादा चाहते हैं कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी बने, इसलिए भुजबल साहब को राष्ट्रीय मंच पर भेजने पर चर्चा हो रही है। इससे पहले भुजबल ने मुंबई में मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

हालांकि, इस मामले में एनसीपी के चीफ अजित पवार कहा है कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है। उन्होंने भुजबल को नामंजूर करते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘यह पार्टी का आंतरिक मामला है, और हम इसे अपने तरीके से हल करेंगे’।

पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा है छगन भुजबल

महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस के साथ बैठक में भुजबल के साथ उनके भतीजे समीर भुजबल भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, फडणवीस ने मुझे बताया कि विधानसभा चुनावों में महायुति की भारी जीत में अन्य पिछड़ा वर्ग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वह इसका ध्यान रखेंगे कि समुदाय के हितों को नुकसान न हो।

महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने फडणवीस मंत्रिमंडल में 39 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। यह समारोह 16 दिसंबर को राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले हुआ। एनसीपी के दिग्गज नेता भुजबल पूर्व डिप्टी सीएम हैं और पिछली महायुति और एमवीए दोनों सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों पर काम कर चुके हैं। उन्हें क्षेत्र में ओबीसी समुदाय के सबसे बड़े नेताओं में से एक माना जाता है। शपथ ग्रहण से पहले भुजबल को कैबिनेट का ‘डिफॉल्ट नाम’ माना जाता था। अब, नाराज भुजबल संकेत दे रहे हैं कि वह जल्द ही अपने राजनीतिक पथ के लिए कोई कठोर निर्णय लेने वाले हैं।

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