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BULLET PROOF CAR : रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड का भी नहीं होगा असर, नीतीश सरकार ला रही हैं बुलेटप्रूफ गाड़ियां

बुलेटप्रूफ गाड़ियां विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नेताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर खरीदी जा रही हैं। इनका उपयोग मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री और अन्य VVIP मेहमानों के सुरक्षा काफिले में किया जाएगा।

by Rakesh Pandey
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पटना: बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार 16 नई बुलेटप्रूफ गाड़ियों की खरीद करेगी, जिन पर कुल 15.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये गाड़ियां रॉकेट लॉन्चर, ग्रेनेड और AK-47 जैसे हथियारों के हमलों को भी झेलने में सक्षम होंगी।

बुलेटप्रूफ गाड़ियों की संख्या और उद्देश्य

कुल 16 बुलेटप्रूफ गाड़ियों की खरीद की जा रही है। ये गाड़ियां विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नेताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर खरीदी जा रही हैं। इनका उपयोग मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री और अन्य VVIP मेहमानों के सुरक्षा काफिले में किया जाएगा। गाड़ियां प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे शीर्ष स्तर के नेताओं के बिहार दौरे के दौरान भी प्रयोग की जाएंगी।

पुरानी गाड़ियों की जगह नई सुरक्षा तकनीक

वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री और जीतन राम मांझी पुरानी बुलेटप्रूफ गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं, जो अब मेंटेनेंस की स्थिति में हैं। नई गाड़ियों के आने के बाद पुरानी गाड़ियों को सुधार के लिए भेजा जाएगा।

बुलेट भी फेल, धमाके भी बेअसर:

बुलेटप्रूफ गाड़ी को सुरक्षित गाड़ी माना जाता है एक-47 की गोली या फिर रॉकेट लांचर का भी असर बुलेट प्रूफ गाड़ी पर नहीं होता है। अगर लैड माइंस के जरिए गाड़ी को विस्फोट के जरिए उड़ाया है तो भी गाड़ी के अंदर बैठे लोगों को कम से कम नुकसान होता है।

मुख्यमंत्री, राज्यपाल के पास रहेगी दो-दो गाड़ियां:

नई बुलेटप्रूफ गाड़ियां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले में शामिल होंगी। इन्हें विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि AK-47 जैसी खतरनाक हथियारों से चलाई गई गोलियां और शक्तिशाली धमाके भी इन पर असर नहीं डाल सकें। मुख्यमंत्री और राज्यपाल को दो-दो गाड़ियां मिलेगी इसके अलावा पुलिस विभाग भी गाड़ियों का इस्तेमाल करेगी।

2 महीने के भीतर खरीदेगी सरकार:

परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक आने वाले 2 महीना के अंदर बुलेट प्रूफ गाड़ी की खरीद की प्रक्रिया को पूरी कर ली जाएगी। गाड़ी पूरे तौर पर सुरक्षित होगी जिन नेताओं को विशिष्ट सुरक्षा दी गई है। वह गाड़ियों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा कुछ गाड़ियां सरकार के पास सुरक्षित होंगे जिसका उपयोग जरूरत पड़ने पर किया जा सकेगा।

बुलेटप्रूफ गाड़ियों की खासियतें:

इन गाड़ियों को एक सीढ़ी-फ्रेम चेसिस पर बनाया गया है। ये कार शानदार स्ट्रेंथ और ड्युरेबिलिटी देती है। गाड़ी में दमदार इंजन और शानदार ऑफ-रोड क्षमताएं हैं, जिससे यह शहरी और दुर्गम इलाकों में भी सहजता से चल सकती है। कार का केबिन बेहद आरामदायक और विशाल है, इसमें अलग-अलग मटेरियल को भी जरूरत के हिसाब से फिट किया जा सकता है।

बुलेटप्रूफिंग कैसे होती है?

गाड़ी की विंडोज़ में बुलेटप्रूफ ग्लास लगाया जाता है। बॉडी पैनल में आर्मर प्लेट फिट की जाती है। फर्श पर ब्लास्ट प्रूफ आर्मर स्टील लगाया जाता है।

सुरक्षा के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल वायरिंग और फ्यूल पाइपिंग को विशेष संरक्षित किया जाता है।

ब्लास्ट प्रूफ फ्लोर:

गाड़ी की फ्लोरिंग पर फ्यूल पाइपिंग, ट्रांसमिशन, आयल और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की जाती है. ब्लास्ट प्रूफ फ्लोर प्रोटेक्शन एक आर्मर्ड स्टील है जो गाड़ी के फर्श में लगाया है, जिससे हाथ से फेंके गए ग्रेनेडों विफल हैं।

बख़्तरबंद छत:

आर्मर ग्रेड छत प्रोटेक्शन को कार की छत वाले हिस्से की सुरक्षा के लिए खास तरह से डिजाइन किया जाता है। इन गाड़ियों में खास फायरिंग स्लॉट्स बनाए जाते हैं।

रन फ्लैट टायर सिस्टम:

यह सिस्टम गाड़ी को एक या उससे ज्यादा फ्लैट टायर से संचालित करने की अनुमति देता है और कार की गतिशीलता को बढ़ाता है।

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