Jharkhand Police Action : रांची : अपने दूसरे कार्यकाल में हेमंत सरकार ने संगठित अपराध के खिलाफ अधिक कड़े रूप का परिचय दिया है। साल 2025 में राज्य में बढ़ते आपराधिक नेटवर्क, रंगदारी, हत्या और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और विशेष एजेंसियों को खुली कार्रवाई की छूट दी।
इसका नतीजा यह रहा कि एक वर्ष के भीतर राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस और अपराधियों के बीच कुल 12 मुठभेड़ की घटनाएं हुईं। इन मुठभेड़ों में पुलिस की गोली से पांच बड़े और कुख्यात अपराधी मारे गए, जबकि आठ अपराधी घायल हुए हैं। 2025 के मुठभेड़ों में जिन अपराधियों को मार गिराया गया, उनमें राज्य और राज्य से बाहर तक दहशत फैलाने वाले नाम शामिल हैं। कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू, उत्तम यादव और राहुल तूरी जैसे अपराधी संगठित गिरोहों के सरगना माने जाते थे।
इन अपराधियों पर हत्या, रंगदारी, अपहरण और अवैध वसूली जैसे दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस के अनुसार, इन गिरोहों की गतिविधियां रांची सहित कई जिलों में फैली हुई थीं और इनके नेटवर्क को तोड़ना बड़ी चुनौती बना हुआ था। बड़े अपराधियों के मारे जाने या घायल होने से गिरोह कमजोर पड़े हैं। कई अपराधी राज्य छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं, जबकि कुछ ने आत्मसमर्पण की राह भी पकड़ी है। संगठित अपराध और टेरर मामले में एटीएस की भूमिका अहम रही है।
एटीएस एसपी ऋषभ झा ने फोटोन न्यूज से विशेष बातचीत में बताया कि 2025 में कई बड़े अपराधियों का सफाया कर दिया है। कई कुख्यातों और आतंकियों को भी सलाखों के पीछे भेजा गया है। उन्होंने कहा है कि साल 2026 संगठित अपराध और टेरर मामलों पर लगाम लगाने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार है। इसपर विशेष फोकस करते हुए काईवाई और तेज की जाएगी।
Encounter Jharkhand 2025 : सबसे ज्यादा रांची में हुए 6 एनकाउंटर
आंकड़ों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि अकेले रांची जिले में सबसे अधिक 6 मुठभेड़ की घटनाएं हुईं। राजधानी होने के कारण रांची लंबे समय से संगठित अपराधियों का गढ़ मानी जाती रही है। यहां कई गिरोह सक्रिय थे, जो व्यापारियों, ठेकेदारों और आम लोगों से रंगदारी वसूलते थे। रांची पुलिस ने खुफिया सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के आधार पर कई बड़े आॅपरेशन चलाए। इन अभियानों में अपराधियों के ठिकानों की पहचान कर दबिश दी गई, जिससे मुठभेड़ों की स्थिति बनी।
100 से अधिक मामलों में वांछित अमन साहू का काम तमाम
वर्ष की शुरूआत से ही पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई थी। 11 जनवरी को रामगढ़ जिले में पुलिस ने कुख्यात अपराधी राहुल तूरी को मुठभेड़ में मार गिराया। इसके बाद 11 मार्च को सौ से अधिक मामलों में वांछित गैंगस्टर अमन साहू को एटीएस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। यह कार्रवाई पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी। 27 मार्च को भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड में शामिल अपराधी रोहित मुठभेड़ में घायल हुआ।
जमशेदपुर में मारा गया मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर अनुज कनौजिया
31 मार्च को उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल, झारखंड एटीएस और जमशेदपुर पुलिस के संयुक्त अभियान में उत्तर प्रदेश का शातिर अपराधी और मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर अनुज कनौजिया मारा गया। यह कार्रवाई अंतरराज्यीय अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी गई। इसके बाद अगस्त में गोड्डा जिले में पुलिस मुठभेड़ में अपराधी सूर्या हांसदा मारा गया।
उत्तम यादव को मुठभेड़ में मार गिराया
20 सितंबर को चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के जबड़ा इलाके में पुलिस ने कुख्यात अपराधी उत्तम यादव को मुठभेड़ में मार गिराया। इसके बाद अक्टूबर माह में लगातार कई मुठभेड़ हुईं। 10 अक्टूबर को रांची के रातू थाना क्षेत्र में राहुल दुबे गिरोह के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई, जिसमें दो अपराधी घायल हुए। 13 अक्टूबर को तुपुदाना इलाके में सुजीत सिन्हा गिरोह के साथ मुठभेड़ में एक अपराधी को गोली लगी। उसी दिन मैक्लुस्कीगंज में आलोक गिरोह के साथ हुई मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी प्रभात कुमार राम घायल हुआ।
धनबाद और चतरा में भी सख्ती
14 अक्टूबर को धनबाद के तेतुलमारी थाना क्षेत्र में पुलिस और कुख्यात अपराधी भानु मांझी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें भानु घायल हो गया। उन्नीस अक्टूबर को रांची के कांके रोड स्थित एक रेस्टोरेंट मालिक की हत्या के आरोपी अभिषेक सिंह के साथ मुठभेड़ हुई और वह भी गोली लगने से घायल हुआ। वर्ष के अंत में पांच दिसंबर को चतरा जिले के पिपरवार थाना क्षेत्र में पुलिस और राहुल सिंह गिरोह के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें गिरोह का सक्रिय सदस्य जुबेर अंसारी घायल हुआ।
नौ जिलों में फैला संगठित अपराध का नेटवर्क
झारखंड में संगठित अपराध केवल एक या दो जिलों तक सीमित नहीं है। रांची, हजारीबाग, पलामू, रामगढ़, चतरा, लातेहार, गढ़वा, धनबाद और जमशेदपुर सहित नौ जिलों में कुल 10 बड़े आपराधिक गिरोह सक्रिय बताए गए हैं। इन गिरोहों से जुड़े अपराधियों की संख्या करीब 633 बताई जा रही है। ये गिरोह अलग-अलग क्षेत्रों में रंगदारी, अवैध खनन, जमीन कब्जा और सुपारी किलिंग जैसे अपराधों में लिप्त रहे हैं। पुलिस के लिए इन नेटवर्क को ध्वस्त करना एक बड़ी चुनौती रही है।
ATS Jharkhand : एटीएस की कार्रवाई से अपराध पर लगाम
संगठित अपराध से निपटने में झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता की भूमिका भी काफी अहम रही है। हाल के महीनों में एटीएस ने योजनाबद्ध तरीके से कई बड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की। खुफिया इनपुट, तकनीकी निगरानी और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर एटीएस ने कई सफल आॅपरेशन अंजाम दिए।
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SP ATS : वर्जन
झारखंड पुलिस, विशेष तौर पर एटीएस अपराधियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। 2025 में कई कुख्यात अपराधियों का सफाया किया जा चुका है। कई अपराधियों और आतंकियों को पकड़कर सलाखों के पीछे भेजा गया है। संगठित अपराध और टेरर मामले को लेकर जो ब्लूप्रिंट तैयार किया है, उस पर विशेष फोकस करते हुए 2026 में और आगे बढ़ाया जाएगा।
ऋषभ झा, एसपी, एटीएस।

