Chaibasa: चाईबासा में आम लोगों के लिए खतरा बन चुके कातिल हाथी को ट्रैक करने की कवायद लगातार जारी है। बीते तीन दिनों से यह जंगली हाथी अचानक लापता है, जिससे वन विभाग की चिंता और ग्रामीणों की दहशत दोनों बढ़ गई हैं। हाथी को काबू में करने के लिए आगरा से वाइल्ड लाइफ एसओएस की विशेष टीम चाईबासा पहुंच चुकी है, जबकि ड्रोन की मदद से जंगल और सीमावर्ती इलाकों की सघन निगरानी की जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, पिछले तीन दिनों में हाथी ने किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं किया है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित इलाकों के लोग डर के साए में जी रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि हाथी घने जंगलों में छिपा हुआ है और मौका मिलते ही फिर से आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है।
आगरा से क्यों बुलाई गई विशेषज्ञ टीम
चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि उत्पाती हाथी को ट्रैंकुलाइज कर नियंत्रित करने के लिए आगरा से वाइल्ड लाइफ एसओएस की अनुभवी टीम को बुलाया गया है। यह टीम देश के कई राज्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में काम कर चुकी है। डीएफओ के अनुसार, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हाथी इतना आक्रामक क्यों हो गया, हालांकि आशंका है कि झुंड से बिछड़ने के कारण उसका व्यवहार हिंसक हो गया है।
डीएफओ ने यह भी बताया कि इस हाथी के हमले में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। न्यूट्रलाइज करने का फैसला केवल वाइल्ड लाइफ वार्डन के आदेश पर ही लिया जाता है और इसके लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
13 दिनों से पश्चिमी सिंहभूम में दहशत
यह दंतैल हाथी एक जनवरी से पश्चिमी सिंहभूम जिले और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में लगातार आतंक मचा रहा है। टोंटो, मझगांव, नोवामुंडी, हाटगम्हरिया सहित कई क्षेत्रों में इसके हमले हो चुके हैं। नोवामुंडी के बाबरिया गांव में छह जनवरी की रात एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
वन विभाग का कहना है कि हाथी प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर तक मूव कर रहा है, जिससे उसकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 22 तक पहुंच चुकी है।
ग्रामीणों में भय, 30 से अधिक गांव हाई अलर्ट पर
बेनीसागर, खड़पोस, नोवामुंडी सीमा क्षेत्र और ओडिशा बॉर्डर से सटे करीब 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कई गांवों में लोग रात में समूह बनाकर पक्के मकानों में सो रहे हैं। महिलाएं और बच्चे सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा चुके हैं, जबकि पुरुष मशाल और टॉर्च लेकर रातभर पहरेदारी कर रहे हैं।
वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और हाथी के मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी की लोकेशन मिलते ही उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित तरीके से काबू में करने की कोशिश की जाएगी।

