Jamshedpur : टाटा स्टील के संस्थापक जेएन टाटा की जयंती की पूर्व संध्या पर लौहनगरी एक बार फिर रंगबिरंगी रोशनी से जगमगा उठी। टाटा ग्रुप के संस्थापक जेएन टाटा की जयंती मंगलवार को मनाई जाएगी। इसे लेकर पूरे शहर को भव्य तरीके से सजाया गया है। खासकर जुबिली की विद्युत सज्जा देखने के काबिल है।
सोमवार शाम ठीक छह बजे टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने जुबिली पार्क में आकर्षक लाइटिंग का विधिवत उद्घाटन किया। इसके साथ ही हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने रोशनी से नहाए पार्क का नजारा देखा। रंगबिरंगी लाइटों, आकर्षक आकृतियों और थीम आधारित सजावट ने वहां पहुंचे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्थापक दिवस का जश्न सिर्फ जुबिली पार्क तक सीमित नहीं है। पूरे जमशेदपुर में चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और प्रमुख इमारतों को विशेष रूप से सजाया गया है। रंगीन झालरों और आकर्षक विद्युत डिजाइन ने शहर को दुल्हन जैसा रूप दे दिया है। रात के अंधेरे में जब रोशनी जगमगाती है, तो पूरा शहर परीलोक में तब्दील नजर आता है। लाइटिंग के उद्घाटन अवसर पर टाटा स्टील ग्रुप के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन भी उपस्थित थे।

20.5 लाख LED लाइट से जगमग हुआ जुबिली पार्क
जुबिली पार्क इस बार रिकॉर्ड 20.5 लाख एलईडी मिनी लाइटों से जगमगा उठा है। वहीं कदमा-सोनारी लिंक रोड को सजाने में 8 लाख, जबकि शहर की हेरिटेज बिल्डिंगों और गोल चक्करों की सजावट में 80 लाख से अधिक एलईडी लाइटों का उपयोग किया गया है। जुबली पार्क में इस वर्ष रोशनी की सजावट को खास बनाने के लिए कबूतर, तितली, हाथी, शेर, मोर, बंदर सहित विभिन्न पक्षियों के साथ-साथ कमल, गुलाब और ट्यूलिप के डिजाइन लाइट लगाए गए हैं। सतरंगी रोशनी के बीच रंगीन वाटर फाउंटेन पार्क की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। संस्थापक दिवस पर जुबली पार्क की यह रोशनी और श्रद्धांजलि आयोजन एक बार फिर जमशेदपुर की पहचान और टाटा परंपरा की भव्य झलक पेश कर रहा है।रतन टाटा की तस्वीर बना मुख्य आकर्षणइस बार श्रद्धांजलि स्वरूप रतन टाटा की तस्वीर एक लाख फूलों से बनाई गई है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वहीं पार्क में संस्थापक जेएन टाटा के साथ रतन टाटा की तस्वीर भी विशेष रूप से डिस्प्ले की गई है।
3 से 6 मार्च तक देख सकेंगे विद्युत साज सज्जा
3 से 6 मार्च तक आम लोग विद्युत सज्जा देख सकेंगेशाम 5 बजे से रात 10 बजे तक आम लोग पैदल प्रवेश करेंगे। वहीं रात 10 से 11 बजे तक चारपहिया, दोपहिया वाहनों से लोग लाइटिंग देख सकेंगे। पैदल इंट्री सीएफई, साकची व निक्को पार्क गेट से होगी। जबकि निकासी सीएफई, साकची और पारसी गेट होगी। जबकि वाहनों का प्रवेश व निकासी सिर्फ सीएफई गेट से होगा। हालांकि 4 मार्च (होली) को लाइटिंग चालू रहेगी, लेकिन पार्क में आम लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगीसुरक्षा के पुख्ता इंतजामविद्युत सज्जा का कार्य टाटा स्टील यूआईएसएल (पूर्व जुस्को) के बिजली विभाग द्वारा किया गया है। जीएम वीपी सिंह और डीएम अनिर्बन भट्टाचार्यी की निगरानी में कर्मचारियों, वेंडरों और पश्चिम बंगाल के चंदननगर के कारीगरों ने इस भव्य सजावट को आकार दिया। बिजली से किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए जगह-जगह डिवाइस सर्किट लगाए गए हैं, जो खतरे की स्थिति में स्वतः बिजली आपूर्ति बंद कर देंगे। वाटर फाउंटेन का डिजाइन भी कंपनी के इंजीनियरों ने ही तैयार किया है।
तीन मिनट पहले हुआ स्विच ऑन
इस वर्ष विद्युत सज्जा का उद्घाटन निर्धारित समय से करीब तीन मिनट पहले हुआ। एन. चंद्रशेखरन ने सोमवार शाम 6:27 बजे जेएन टाटा की प्रतिमा के पास बटन दबाकर लाइटिंग का शुभारंभ किया और संस्थापक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन सहित कंपनी के वरीय पदाधिकारियों, यूनियन नेताओं और कर्मचारियों ने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
तकनीक के उपयोग से बिजली खपत में आई एक तिहाई की कमी
64 बीम और सर्पिल लाइटों से विभिन्न आकृतियां उकेरी गई हैं, जो दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। पार्क में 18 गुणा 16 वर्ग फीट का विशाल स्क्रीन लगाया गया है। इसके अलावा 300 से 400 फोकस लाइट और उतनी ही संख्या में आधुनिक मॉडल की सेल्फ सर्पिल लाइटें विद्युत सज्जा की भव्यता को और बढ़ा रही हैं।
होगी 50 हजार यूनिट बिजली की खपत
टाटा स्टील यूआईएसएल के पीएसडी विभाग के महाप्रबंधक वीपी सिंह ने बताया कि एलईडी लाइटों के उपयोग से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है। जुबली पार्क की इस वर्ष की विद्युत सज्जा में करीब 50 हजार यूनिट बिजली की खपत होगी, जबकि पूर्व में यह खपत डेढ़ से दो लाख यूनिट तक होती थी। उन्होंने बताया कि इस विद्युत सज्जा में खर्च होने वाली बिजली की भरपाई कंपनी द्वारा यहां लगाए गए वृक्षों से वर्ष भर में होने वाले ऊर्जा उत्पादन से हो जाती है, जिससे यह सजावट पर्यावरण के लिहाज से भी संतुलित और टिकाऊ है। संस्थापक दिवस की पूर्व संध्या पर जुबली पार्क और शहर की यह भव्य रोशनी न सिर्फ टाटा परंपरा का प्रतीक बनी, बल्कि जमशेदपुरवासियों के लिए उत्सव और गौरव का अवसर भी लेकर आई।
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