चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है ताजा मामला है पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र के बुनुमलता पताबुरु का है। जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह मंझारी थाना क्षेत्र के रोलाडीह गांव निवासी 56 वर्ष सुशील बिरुआ बुधवार सुबह अपने तीन साथियों के साथ जंगल में पत्ते तोड़ने बुनुमलता पताबुरु जंगल गया था।
साथियों ने भाग कर बचाई जान
जंगल में अचानक उन लोगों का हाथी से सामना हो गया। हाथी को देखते ही सभी ने भागना शुरू कर दिया। सुशील बिरुआ के तीनों साथी तो भागने में सफल रहे, लेकिन सुशील बिरुआ को हाथी ने अपने सूंड से पकड़ कर खींच कर जमीन में पटक दिया। जिससे उसकी घटना स्थल पर मौत हो गई।घटना के बाद मृतक के तीनों साथी जंगल से जान बचाकर भागे। सुशील बिरुआ के साथियों ने ग्रामीणों को इस बात की जानकारी दी।
सुशील बिरूआ का शव बरामद
घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया। बाद में गांव वाले पारंपरिक हथियारों से लैस होकर मृतक को खोजने के लिए जंगल पहुंचे। लेकिन उन्हें घटनास्थल पर खोजने पर कहीं भी कुछ पता नहीं चल पाया। शाम होने के चलते ग्रामीण लौट गए और अगले दिन गुरुवार को ग्रामीणों का एक दल सुशील को ढ़ूढ़ने के लिए जंगल रवाना हुआ। काफी खोजबीन के बाद घटनास्थल से काफी दूर सुशील बिरुआ का शव बरामद हुआ।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
ग्रामीणों द्वारा जंगल से शव लाते हुए शाम हो जाने के कारण शुक्रवार को पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल भेज दिया।
वन विभाग की ओर से परिजनों को दी गई सहयोग राशि
चाईबासा वन विभाग ने घटनास्थल पहुंचकर हाथी की खोज में जुट गये है। वन विभाग ने शुक्रवार को चाईबासा पोस्टमार्टम हाउस के पास मृतक के परिजनों को तत्काल 15 हजार का राशि प्रदान की। वन विभाग ने आश्वासन दिया कि सब सभी कागजी कार्रवाई के बाद बकाया धनराशि दी जाएगी।
वन विभाग के प्रति ग्रामीण का आक्रोश
बता दें हाथी हमले में तीन महीने में करीब 24 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। क्षेत्र में हाथी के आने व ग्रामीणों के ऊपर हमला कर मौत के घाट उतार देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों का वन विभाग के प्रति काफी आक्रोश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के निष्कर्ता के कारण आज ग्रामीण की मौत का सिलसिला लगातार चल रहा है। वन विभाग इस पर अंकुश लगाने में पूरी तरह अब तक असफल हैं। आलम यह हो गया कि लोग अब रात्रि में कहीं आना-जाना भी नहीं कर रहे हैं। लोग तो जंगल जाना ही भूल गए जिससे उनको रोजी-रोटी पर लाली पड़ गई।

