RANCHI: राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार नई पहल कर रही है। इसके लिए इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसरों का सहयोग लेगी। इसे लेकर राज्य में इंफ्लुएंसर इंगेजमेंट पॉलिसी लागू करने को लेकर कदम बढ़ा दिया है। पर्यटन विहार पतरातु में सोमवार को पर्यटन विभाग ने राज्यस्तरीय इंफ्लुएंसर मीट का आयोजन किया है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने वेबसाइट भी लॉन्च किया। जिस पर मीडिया इनफ्लुएंसर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। वहीं पॉलिसी में झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के डिजिटल माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने वाले इंफ्लुएंसर्स को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। साथ ही विभाग डिजिटल कंटेट के निर्माण में सहयोग भी प्रदान करेगा।

लोगों की ‘बकेट लिस्ट’ में झारखंड नहीं था शामिल
मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए डिजिटल विजिबिलिटी सबसे बड़ा हथियार बनेगी। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर महंगे विज्ञापन या कुछ मिनट के प्रमोशनल वीडियो की तुलना में सोशल मीडिया आधारित वीडियो ज्यादा प्रभावी साबित होगा। यहां के लोकल भाषा में हमारे इनफ्लुएंसर ज्यादा बेहतर वीडियो बना सकते है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक झारखंड पर्यटन के नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान नहीं बना पाया। कोविड के बाद जब लोग घूमने निकलने लगे, तब भी अधिकांश लोगों की ‘बकेट लिस्ट’ में झारखंड शामिल नहीं था। जिन लोगों का राज्य से कोई सीधा संबंध नहीं रहा, उन्हें झारखंड के पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक सुंदरता और यहां की संस्कृति के बारे में बहुत कम जानकारी रही। इसके साथ ही नक्सल घटनाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर बनी नकारात्मक छवि ने भी पर्यटन संभावनाओं को प्रभावित किया।

आसपास के राज्यों का असर झारखंड पर
मंत्री ने कहा कि कई बार छत्तीसगढ़ या दूसरे राज्यों की घटनाओं का असर भी झारखंड की छवि पर पड़ा। देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग यहां के हालात को लेकर चिंता जताते थे। ऐसे माहौल में सबसे पहले यह महसूस किया गया कि झारखंड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगभग अदृश्य है। लोग अगर किसी पर्यटन स्थल की जानकारी लेना चाहते हैं तो उन्हें झारखंड के बारे में पर्याप्त और आकर्षक कंटेंट नहीं मिलता। इसी सोच के साथ अब पर्यटन विभाग डिजिटल मीडिया इनफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को भागीदार बनाकर आगे बढ़ने की रणनीति तैयार कर रहा है।
विभाग का मानना है कि स्थानीय लोग, ट्रैवल ब्लॉगर और डिजिटल क्रिएटर झारखंड की असली कहानी दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति घाटशिला, नेतरहाट, बेतला, दशम फॉल या राज्य के किसी छोटे पर्यटन स्थल के बारे में वास्तविक अनुभव साझा करेगा, तो उसका प्रभाव ज्यादा होगा।

झारखंड में मानसून टूरिज्म
कार्यक्रम में मानसून डेस्टिनेशन को लेकर भी विशेष जोर दिया। मंत्री ने कहा कि झारखंड देश का सबसे सुरक्षित मानसून डेस्टिनेशन बन सकता है। राज्य के झरने, पहाड़, जंगल और हरियाली बारिश के मौसम में अपनी सबसे खूबसूरत छवि पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में लगभग 3 महीने तक मानसून का आकर्षण बना रहता है, जिसे मानसून मैजिक के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने रण आफ कच्छ का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर चार महीने का इवेंट ही पूरे साल की कमाई का सोर्स है। हमारे यहां पर इस तरह की संभावनाएं भरपूर है।
इस काम में हम इनफ्लुएंसर की मदद लेंगे और उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाएंगे। साथ ही यहां आने वाले लोगों को सुरक्षा के अलावा सारी सुविधाएं दी जाएगी। जिससे कि लोग कभी भी बेफिक्र होकर टूरिस्ट प्लेस पर जा सके। टूरिस्ट प्लेस पर एक दुर्घटना ने राज्य को शर्मसार किया था। लेकिन हम इस सोच को बदलेंगे।
झारखंड की सकारात्मक छवि लोगों तक पहुंचे
पर्यटन सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि विभाग बदलते समय के साथ खुद को अपडेट कर रहा है और डिजिटल मीडिया के महत्व को समझते हुए नई रणनीति लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग और डिजिटल क्रिएटर्स एक परिवार की तरह मिलकर काम करेंगे ताकि झारखंड की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुंचे। कार्यक्रम में कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की गई कि वे राज्य की सुंदरता, स्वच्छता, सुरक्षा, सुविधाओं और सकारात्मक कहानियों को ईमानदारी से लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि राज्य की छवि सरकार नहीं बल्कि यहां के लोग मिलकर बनाते हैं और हर नागरिक अपने राज्य का ब्रांड एंबेसडर है।

