RANCHI : विश्व लूपस दिवस के अवसर पर लूपस या ल्यूपस जैसी गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रिम्स के स्किन ओपीडी में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और उपस्थित लोगों को लूपस बीमारी के लक्षण, पहचान और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज में इस बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और समय पर इलाज के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
सामान्य लक्षण को न करें इग्नोर
विशेषज्ञों ने बताया कि लूपस एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही अंगों और ऊतकों पर हमला करने लगती है। यह बीमारी त्वचा, जोड़ों, किडनी, रक्त, फेफड़ों सहित शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। समय रहते पहचान नहीं होने पर यह गंभीर रूप भी ले सकती है। इस दौरान बताया गया कि लूपस के सामान्य लक्षणों में बार-बार बुखार आना, अत्यधिक थकान महसूस होना, जोड़ों में दर्द और सूजन, चेहरे पर तितली के आकार का लाल चकत्ता (बटरफ्लाई रैश), धूप से एलर्जी, बाल झड़ना, मुंह में छाले और सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। कुछ मरीजों में किडनी से जुड़ी समस्याएं, खून की कमी और रक्त के असामान्य थक्के बनने जैसी दिक्कतें भी सामने आती हैं।
टेस्ट से ही पुष्टि संभव
डॉक्टरों ने कहा कि लूपस की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जाती, बल्कि रक्त जांच जैसे एएनए, एंटी डीएस डीएनए और अन्य जरूरी जांचों के माध्यम से इसकी पुष्टि की जाती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समय पर निदान और उचित इलाज से मरीज सामान्य एवं बेहतर जीवन जी सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में लोगों से अपील की गई कि वे जागरूकता, संवेदनशीलता और समय पर उपचार को अपनाकर लूपस जैसी बीमारी से लड़ने में सहयोग करें।

