चाईबासा : झारखंड के सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगल में सुरक्षाबलों के लगातार दबाव के आगे नक्सली संगठन की कमर टूट गई है। 26 साल से आतंक का पर्याय बने नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान का बड़ा असर दिखा है। गुरुवार को पहली बार एक साथ 27 इनामी नक्सली पुलिस मुख्यालय, रांची में सरेंडर करेंगे। सरेंडर की तैयारी पूरी कर ली गई है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सरेंडर करने वालों में माओवादी संगठन के बड़े और सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इनमें 7 विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, 7 एरिया कमांडर और 13 सक्रिय कैडर हैं। इनके आत्मसमर्पण से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी और रांची क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को करारा झटका लगेगा।
बड़े नाम शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे चर्चित नाम सागेन अंगरिया उर्फ दोकोल का है। गोइलकेरा निवासी इस विशेष क्षेत्र समिति सदस्य पर अकेले 123 मामले दर्ज हैं। यह कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है। इसके अलावा पांच-पांच लाख के इनामी गादी मुंडा उर्फ गुलशन (बुंडू, रांची) पर 48 मामले, नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा उर्फ मुखिया (अड़की, खूंटी) पर 38 मामले दर्ज हैं। रेखा मुंडा उर्फ जयंती (बुंडू, रांची) और सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा (छोटानगरा, चाईबासा) पर भी पांच-पांच लाख का इनाम घोषित है।
दो लाख के इनामी करण तियू (गोइलकेरा) पर 29 मामले दर्ज हैं। एरिया कमांडर रैंक के बासुमती जेराई उर्फ बासू (किरीबुरू) पर एक लाख का इनाम है और 14 मामले दर्ज हैं। रघु कायम उर्फ गुणा पर 19 और किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका पर 11 मामले हैं। 13 सक्रिय कैडरों में वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, डांगुर बोइपाई, बसंती देवगम, मुन्नीराम मुंडा, अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई उर्फ निति हेंब्रम और लादू तिरिया भी हथियार डालेंगे।
426 घटनाओं में शामिल
इन नक्सलियों पर दर्जनों पुलिस जवानों की हत्या, पुलिस मुठभेड़, लेवी वसूली, विस्फोट, आगजनी और हथियारबंद हमलों जैसी 426 नक्सली घटनाओं में शामिल होने के मामले दर्ज हैं।
बड़ी संख्या में हथियार सौंपेंगे
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सली बड़ी संख्या में आधुनिक हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपेंगे। इनमें एक इंसास एलएमजी, पांच इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन राइफल, एक पिस्टल, 31 मैगजीन और 2987 राउंड कारतूस शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में हथियारों का बरामद होना कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के खत्म होने का संकेत है। पुलिस का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति और लगातार चल रहे ऑपरेशन से नक्सलियों का मनोबल टूटा है। सारंडा अब नक्सल मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है।

