RANCHI : झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और गुरुवार का दिन राज्य के लिए उपलब्धियों वाला रहा। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सक्रिय 27 नक्सलियों ने गुरुवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में विधिवत आत्मसमर्पण कर दिया। इसे झारखंड के नक्सल इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक सरेंडर माना जा रहा है। नई दिशा नई पहल के तहत अब नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति से जोड़ा जाएगा।
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता मिसिर बेसरा के दस्ते से जुड़े बताए जा रहे हैं। मिसिर बेसरा के सारंडा क्षेत्र से फरार होने के बाद संगठन की पकड़ कमजोर पड़ी और बचे हुए नक्सलियों पर भी आत्मसमर्पण का दबाव बढ़ा। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे सारंडा में नक्सली नेटवर्क लगभग समाप्त हो जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों के लगातार अभियान के बीच कई महिला नक्सलियों समेत दो दर्जन से अधिक उग्रवादियों ने जंगल में ही हथियार डाल दिए थे। इनमें कुछ हार्डकोर महिला नक्सलियों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने एलएमजी, राइफल समेत करीब एक दर्जन हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपे हैं। सारंडा में पहले 45 से 50 नक्सली सक्रिय थे, लेकिन हालिया सरेंडर और अभियान के बाद उनकी संख्या काफी घट गई है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में डीजीपी सहित कोल्हान क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
झारखंड सरकार की संशोधित सरेंडर नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को ओपन जेल में रहने की सुविधा दी जाएगी, जहां वे अपने परिवार के साथ रह सकेंगे। इसे राज्य में नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके अलावा वहां सरकार की योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

