Home » PM Awas Yojana Gramin : प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की कड़ी पड़ताल शुरू, सोशल ऑडिट में 16 जिलों में 1.09 लाख से अधिक लाभुकों की होगी जनसुनवाई

PM Awas Yojana Gramin : प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की कड़ी पड़ताल शुरू, सोशल ऑडिट में 16 जिलों में 1.09 लाख से अधिक लाभुकों की होगी जनसुनवाई

by Nikhil Kumar
PM Awas Yojana Gramin
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बने आवासों को लेकर अब बड़े स्तर पर जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू हो गई है। झारखंड सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी ने राज्य के 16 जिलों की 769 पंचायतों में 1 लाख 9 हजार 805 आवासों और लाभुकों का सामाजिक अंकेक्षण पूरा कर लिया है। अब अगले चरण में पंचायत और प्रखंड स्तर पर जनसुनवाई कर यह जांच की जा रही है कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचा या नहीं, आवास समय पर बने या नहीं और निर्माण व भुगतान प्रक्रिया में कहीं अनियमितता तो नहीं हुई।


ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर चल रहे इस अभियान को राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की अब तक की सबसे बड़ी निगरानी प्रक्रिया माना जा रहा है। सामाजिक अंकेक्षण के दौरान लाभुक चयन, भुगतान, मजदूरी, आवास निर्माण की गुणवत्ता, शौचालय निर्माण, बिजली कनेक्शन, पेयजल सुविधा और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ की भी जांच की गई है।


झारखंड सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी की ओर से सभी संबंधित उपायुक्तों और उप विकास आयुक्तों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि सामाजिक अंकेक्षण के बाद सामने आए मामलों की सुनवाई प्रखंड स्तर पर तय कैलेंडर के अनुसार कराई जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंकेक्षण प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र होगी और योजना से जुड़ी क्रियान्वयन एजेंसियों को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होगी।

दस्तावेजों की होगी बारीक जांच

सामाजिक अंकेक्षण टीम को पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। इनमें स्थायी प्रतीक्षा सूची, वार्षिक चयन सूची, ग्रामसभा की कार्यवाही, मस्टर रोल, भुगतान आदेश, लाभुकों के बैंक भुगतान रिकॉर्ड, आवास निर्माण की पांच चरणों की तस्वीरें, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, शौचालय और पेयजल सुविधा से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।


अंकेक्षण टीम यह भी जांच करेगी कि जिन लाभुकों को आवास स्वीकृत हुआ, क्या वे वास्तव में पात्र थे या नहीं। इसके साथ ही निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने, राशि भुगतान में देरी, बिचौलियों की भूमिका और पंचायत स्तर पर हुई गड़बड़ियों की भी पड़ताल होगी।

पंचायत से प्रखंड स्तर तक होगी जवाबदेही तय

निर्देश के अनुसार पहले पंचायत स्तर पर जनसुनवाई होगी, जिसमें ग्रामीण, लाभुक, वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत सचिव, आवास मित्र, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और सामाजिक अंकेक्षण टीम मौजूद रहेगी। इस दौरान ग्रामीण सीधे अपनी शिकायत और अनुभव रख सकेंगे।
इसके बाद प्रखंड स्तर पर दूसरी जनसुनवाई होगी, जहां पंचायत स्तर पर लंबित मामलों और गंभीर शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों का समाधान पंचायत स्तर पर नहीं हो सकेगा, उन पर प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा।

कई जिलों में जारी हो चुका है कैलेंडर

जारी कार्यक्रम के अनुसार बोकारो के चंदनकियारी में 29 मई, चतरा के प्रतापपुर में 29 मई, देवघर के सारठ और मोहनपुर में मई के मध्य, जबकि धनबाद के टुंडी, पूर्वी टुंडी, निरसा, कलियासोल और तोपचांची में 20 से 22 मई तक जनसुनवाई हो रही है।
गढ़वा जिले के कई प्रखंडों — कांडी, केतार, मंझिआंव, मेराल, रमकंडा, रमना और रंका — में 29 मई से 10 जून तक कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। रांची जिले के कांके और लापुंग में भी सुनवाई की तारीख तय कर दी गई है।

क्या होगा इसका असर

इस बड़े सामाजिक अंकेक्षण का सबसे बड़ा असर यह होगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। जिन पंचायतों या अधिकारियों पर लाभुक चयन में गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा, भुगतान में अनियमितता या निर्माण में लापरवाही के आरोप हैं, उन पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

इसके अलावा अधूरे पड़े आवासों को पूरा कराने, छूटे हुए पात्र लाभुकों की पहचान करने और लाभुकों को अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। ग्रामीणों को पहली बार सार्वजनिक मंच पर सीधे अधिकारियों से सवाल पूछने और शिकायत दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

Read Also– RANCHI NEWS : दून टेंट हाउस के गोदाम में लगी आग, लाखों का सामान जलकर खाक

Related Articles

Leave a Comment