RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को गुमला से 2018 में लापता हुई एक नाबालिग बच्ची के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि करीब सात साल बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलना लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने तीखा सवाल किया कि क्या बच्ची को खोजने के लिए पुलिस को और एक साल का समय चाहिए।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया कि बच्ची अब तक ट्रेसलेस है। इस पर कोर्ट ने कहा कि लगातार प्रयासों के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकलना अनुसंधान में कमी को दर्शाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि प्रगति नहीं हुई तो केस केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपा जा सकता है।
कोर्ट के निर्देश पर गुमला एसपी, एसआईटी प्रमुख और जांच अधिकारी पेश हुए थे। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गठित विशेष जांच दल की तीन टीमें बच्ची की तलाश में मुंबई, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू तक गई हैं। साथ ही दक्षिण पूर्व रेलवे से बच्ची के संभावित यात्रा रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई है। सरकार ने कोर्ट से अनुरोध किया कि एसआईटी के लौटने और रेलवे से जानकारी मिलने तक का समय दिया जाए। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। बता दें कि यह मामला सितंबर 2018 में गुमला से लापता हुई छह वर्षीय बच्ची से जुड़ा है, जिसकी बरामदगी के लिए उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है।

