Ranchi : झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों के भीतर उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज हो गया है। सत्ता पक्ष के प्रमुख घटक दल सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन की रणनीति बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इस बार राज्यसभा के लिए किसी आदिवासी चेहरे पर दांव लगा सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहन अंजली सोरेन का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में शामिल है। वहीं कांग्रेस की ओर से गैर-आदिवासी या सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना जताई जा रही है।
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से एक सीट पर कांग्रेस अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। पार्टी का तर्क है कि महागठबंधन में उसके 16 विधायक हैं और वह गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए उसे एक सीट मिलनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान का संदेश लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात भी की है। इस दौरान राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को देने के मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विचार-विमर्श के लिए कुछ समय मांगा था। माना जा रहा है कि सोमवार को झामुमो की ओर से गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
उधर कांग्रेस में भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार के नाम पर विचार कर रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछड़ा वर्ग से उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है, क्योंकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक दल के नेता दोनों ही पिछड़ा वर्ग से आते हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग के किसी चेहरे को मौका देकर व्यापक सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की जा सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती ऐसे उम्मीदवार के चयन की होगी, जो पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी स्वीकार्य हो। यही वजह है कि कांग्रेस अंतिम निर्णय लेने से पहले झामुमो के रुख और उसके उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार कर रही है।
यदि महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो दोनों सीटों पर गठबंधन की जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है और सभी की नजरें झामुमो तथा कांग्रेस के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

