
Jamshedpur : झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन अभयारण्य में इन दिनों बाघों की मौजूदगी के प्रमाण तलाशने के लिए बड़े पैमाने पर कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चल रही टाइगर एस्टीमेशन (बाघ गणना) प्रक्रिया के तहत दलमा में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, दलमा क्षेत्र में पहले से करीब 50 कैमरा ट्रैप सक्रिय थे। अब पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन ने अतिरिक्त 200 कैमरा ट्रैप लगाकर निगरानी को और मजबूत कर दिया है। इन कैमरों के जरिए बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा रही हैं। गौरतलब है कि दलमा में पिछले साल फरवरी को एक बाघ दिखाई दिया था। यह बाघ घाटशिला और चाकुलिया से होते हुए दलमा पहुंचा था। अगर दलमा में इस साल बाघ नजर आया तो यहां के पर्यावरण के लिए अच्छी खबर होगी।
टाइगर एस्टीमेशन कार्यक्रम के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को झारखंड का नोडल केंद्र बनाया गया है। कैमरा ट्रैप से प्राप्त सभी आंकड़े पीटीआर के पास भेजे जाएंगे, जहां से उन्हें विश्लेषण के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून को उपलब्ध कराया जाएगा।
दलमा मुख्य रूप से हाथियों के लिए जाना जाता है, लेकिन समय-समय पर यहां बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचनाएं भी सामने आती रही हैं। इसी वजह से बाघों की संभावित उपस्थिति की पुष्टि के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि दलमा के कई संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इनके माध्यम से बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एस्टीमेशन प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
गत वर्ष शुरू हुई थी गणना
गौरतलब है कि झारखंड में 15 दिसंबर 2025 से बाघों की गणना का कार्य शुरू हुआ था। यह प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जा रही है। राज्य के पांच रिजर्व क्षेत्रों और 31 वन प्रभागों में बाघों की गणना की जा रही है। इस सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2027 में जारी किए जाने की संभावना है।
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