
रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 को लेकर निर्वाचन आयोग ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) का तीसरा संस्करण जारी किया है। इसमें मतदाताओं की शंकाओं का समाधान करते हुए स्पष्ट किया गया है कि भारतीय नागरिक नहीं होने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति मतदाता बनने के उद्देश्य से गणना प्रपत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरता है, झूठी या भ्रामक जानकारी देता है अथवा अधूरी जानकारी के साथ गलत घोषणा कर प्रपत्र जमा करता है, तो उसके विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वर्ष 2026 की मतदाता सूची में पहले से शामिल मतदाताओं के लिए हाल की रंगीन फोटो देना अनिवार्य नहीं है। फिर भी मतदाता सूची के रिकॉर्ड को अद्यतन करने और नया फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र जारी करने के लिए मतदाताओं से हाल की रंगीन फोटो उपलब्ध कराने या मतदाता स्तर अधिकारी (बीएलओ) के मोबाइल ऐप के माध्यम से लाइव फोटो देने का अनुरोध किया गया है। यदि कोई मतदाता नौकरी, पढ़ाई, बीमारी या किसी अन्य कारण से घर पर मौजूद नहीं है, तो उसका परिवार हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र के साथ हाल की पासपोर्ट आकार की रंगीन फोटो जमा कर सकता है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि गणना प्रपत्र भरने में किसी प्रकार की त्रुटि हो जाने या किसी कॉलम के छूट जाने पर केवल इसी आधार पर प्रपत्र खारिज नहीं किया जाएगा। मतदाता स्तर अधिकारी आवश्यक जानकारी लेकर प्रपत्र को डिजिटाइज करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी तथा निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के पास भेजा जाएगा। यदि किसी जानकारी को लेकर संदेह होगा तो संबंधित अधिकारी नोटिस जारी कर मतदाता से आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगेंगे। मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
एफएक्यू में यह भी बताया गया है कि यदि गणना प्रपत्र की दोनों प्रतियां खराब हो जाती हैं, तो मतदाता निर्वाचन आयोग के ईसीआईनेट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन गणना प्रपत्र भर सकते हैं। यदि ऑनलाइन सुविधा का उपयोग संभव नहीं हो, तो संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी से गणना प्रपत्र की नई प्रति भी प्राप्त की जा सकती है।
निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे गणना प्रपत्र पूरी सावधानी से भरें, सभी आवश्यक कॉलम सही जानकारी के साथ भरें और केवल सत्य जानकारी ही उपलब्ध कराएं। आयोग ने दोहराया है कि भारतीय नागरिक नहीं होने के बावजूद मतदाता बनने का प्रयास करना, गलत जानकारी देना या झूठी घोषणा के साथ गणना प्रपत्र जमा करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

