
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत नोवामुंडी और हाटगम्हरिया प्रखंड के इलाकों में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात हाथियों के एक झुंड ने बड़ा पासेया गांव में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने खेतों में खड़ी धान की फसलों को बेरहमी से रौंद डाला और कटहल के पेड़ों को तोड़कर फल खा गए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

रातभर मचा रहा हड़कंप, वनकर्मियों ने मशाल जलाकर खदेड़ा
हाथियों को आबादी और खेतों के करीब देखकर ग्रामीण खौफ के मारे घरों में दुबक गए। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। इसके बाद ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर मोर्चा संभाला। रातभर मशालें जलाकर, ढोल-नगाड़े बजाकर और शोर मचाकर हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया गया। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार झुंड को वापस जंगल की ओर खदेड़ा जा सका।
किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद, मुआवजे की मांग
स्थानीय किसानों का कहना है कि धान की फसल लगभग तैयार होने वाली थी, लेकिन हाथियों ने एक ही रात में महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार
गितिकुंदू, बड़ा पासेया, सेलदौरी, डूंमूरजोरा और कितनतोना गांव में पिछले कुछ महीनों से हाथियों की आवाजाही काफी बढ़ गई है,फसल कटने के इस मौसम में हाथी हर रात गांवों को निशाना बना रहे हैं,ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को रोकने के लिए स्थायी समाधान करने और बर्बाद हुई फसलों का तुरंत सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों का दर्द
हर साल हमारी फसलें बर्बाद होती हैं, लेकिन मुआवजा समय पर नहीं मिलता। हाथियों के डर से हमारे बच्चों और बुजुर्गों की नींद उड़ गई है।
वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
मामले पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीम गश्त कर रही है। विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और रात के समय अकेले जंगल की तरफ न जाने की अपील की है।

