
Jamshedpur : झारखंड में सरकारी और गैर मजरुआ जमीनों के संरक्षण और उन पर अवैध दावों को खारिज कराने के लिए राज्य सरकार अब सीधे अदालत की शरण में जाएगी। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्तों (डीसी) को पत्र जारी कर ऐसी जमीनों के मालिकाना हक (टाइटल) की घोषणा और अवैध निबंधित सेल डीड (रजिस्ट्री) को रद्द कराने के लिए ‘टाइटिल सूट’ (दीवानी मुकदमा) दायर करने का निर्देश दिया है। यह आदेश विभाग के सचिव चंद्रशेखर द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी पत्र (ज्ञापांक 2786) के जरिए दिया गया है।
उच्च न्यायालय के फैसले के बाद बदला रुख
दरअसल, झारखंड उच्च न्यायालय ने डब्ल्यूपी (सी) नंबर. 5088/2018 में 1 मई 2025 को फैसला सुनाते हुए निबंधन अधिनियम की धारा-22 ‘क’ और विभागीय अधिसूचना-1132 (दिनांक 26.08.2015) के तहत बनाई गई जमीनों की ‘प्रतिबंधित सूची’ को निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (एसएलपी डेयरी नंबर. 41797/2025) दायर की है, जो फिलहाल सुनवाई के लिए लंबित है।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बड़ी संख्या में लोग जमीनों को प्रतिबंधित सूची से मुक्त कराने के लिए अदालत पहुंच रहे थे और कई मामलों में राहत भी पा चुके थे।
महाधिवक्ता की कानूनी सलाह पर लिया गया फैसला
इस स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने राज्य के विद्वान महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) से कानूनी परामर्श मांगा था। महाधिवक्ता ने सलाह दी कि जब तक उच्चतम न्यायालय से फैसला नहीं आता, तब तक पूर्व के न्यायिक दृष्टांतों (जैसे ‘राज्य सरकार बनाम चंचला देवी’ मामला) और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत यदि सरकार किसी जमीन पर किसी व्यक्ति के दावे को खारिज करती है, तो सरकार को खुद टाइटिल सूट दायर करना चाहिए।
उपायुक्तों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
महाधिवक्ता की इसी विधिक राय के आलोक में विभाग ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR), जिला अवर निबंधकों और अंचलाधिकारियों (CO) को निर्देश दिया है कि वे सरकारी भूमि के बचाव के लिए अदालतों में टाइटिल सूट दायर करें और की गई कार्रवाई की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराएं।

