
रांची : झारखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब जिन सेवाओं में मूल पद पर दो वर्ष का प्रोबेशन और अगले पद पर प्रमोशन के लिए दो या तीन वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित है, वहां पदोन्नति की पात्रता तय करने के लिए प्रोबेशन की अवधि भी जोड़ी जाएगी। यानी कई मामलों में कर्मचारियों को पहले की तुलना में अधिक समय बाद प्रमोशन मिल सकेगा। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी कर नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है।
राज्य सरकार ने 4 अप्रैल 2014 को जारी संकल्प संख्या-3286 में संशोधन करते हुए उसकी कंडिका-3 को हटाकर नए प्रावधान जोड़े हैं। सरकार का कहना है कि कई सेवाओं में प्रोबेशन और पदोन्नति की न्यूनतम सेवा अवधि समान होने के कारण दोनों साथ-साथ चल रही थीं, जो व्यावहारिक नहीं थी। इसी विसंगति को दूर करने के लिए यह संशोधन किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी कर्मचारी के मूल पद पर दो वर्ष का प्रोबेशन है और अगले पद पर प्रमोशन के लिए दो वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित है, तो अब उसे प्रोन्नति के लिए कुल चार वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। इसी प्रकार जहां तीन वर्ष की पदोन्नति अवधि निर्धारित है, वहां प्रोबेशन की अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी।
संकल्प में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन वेतन ग्रेडों के बीच पदोन्नति की अवधि पहले निर्धारित नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन सेवाशर्त नियमावलियों में पहले से पदोन्नति की अवधि निर्धारित है, वहां वही नियम लागू रहेंगे। जबकि जिन सेवाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, वहां संशोधित संकल्प के प्रावधान प्रभावी होंगे। 2014 के मूल संकल्प की अन्य सभी कंडिकाएं यथावत रहेंगी। यह संशोधन मंत्रिपरिषद की 2 जुलाई 2026 की बैठक में स्वीकृत प्रस्ताव के आधार पर किया गया है और 6 जुलाई 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

