
Garhwa : जिले के डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद शर्मनाक और दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत से गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सोमवार को अस्पताल परिसर में शव रखकर जमकर हंगामा किया और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुआवजे के साथ-साथ दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले मेराल सीएचसी प्रभारी डॉ. वीरेंद्र कुमार अस्पताल पहुंचे और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन आक्रोशित परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए। ग्रामीणों ने गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जेएफ कनेडी को मौके पर बुलाने की मांग की। दोपहर साढ़े तीन बजे जब सिविल सर्जन घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने परिजनों और जनप्रतिनिधियों के साथ वार्ता की।
उन्होंने अस्पताल की अव्यवस्थाओं को दूर करने और लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर, नर्स तथा संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद परिजन नहीं माने और ठोस आश्वासन न मिलने तक सिविल सर्जन तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को बंधक बना लिया।
यह है पूरा मामला
मृतका कमला कुमारी (पति सोनू कुमार कुशवाहा) को 4 जुलाई 2026 की रात करीब साढ़े आठ बजे प्रसव के लिए डंडई सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भोर करीब साढ़े तीन बजे नर्स सोनी कुमारी ने प्रसव कराया, जिसमें महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। आरोप है कि प्रसव के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे महिला को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
हद तो तब हो गई जब संबंधित नर्स ने किसी डॉक्टर या वरिष्ठ नर्स को बुलाने के बजाय सफाईकर्मी मानमती देवी को अस्पताल बुला लिया। प्रसव के बाद करीब साढ़े तीन घंटे तक महिला का खून बहता रहा, लेकिन न तो उसे नियंत्रित किया गया और न ही समय पर रेफर किया गया। परिजन लगातार महिला को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की गुहार लगाते रहे, पर उनकी बात नहीं सुनी गई।
जब स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब उन्हें अस्पताल से बाहर ले जाने को कहा गया। सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण परिजन निजी वाहन से महिला को गढ़वा के एक निजी अस्पताल एमजीएम ले गए। वहां इलाज के नाम पर 44 हजार रुपये वसूले गए और तीन यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। स्थिति में सुधार न होने पर वहां से भी उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन उसे मेदिनीनगर के नारायणा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। भारी-भरकम पैसे खर्च होने के बाद भी महिला की जान नहीं बच सकी। मौत के बाद आक्रोशित परिजन शव लेकर सोमवार सुबह वापस डंडई स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बीडीओ की पहल पर समाप्त हुआ धरना
घटना के विरोध में सोमवार सुबह से लेकर शाम लगभग चार बजे तक अस्पताल परिसर रणक्षेत्र बना रहा। इस दौरान सिविल सर्जन और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल परिसर में ही रोके रखा। बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी देवलाल करमाली मौके पर पहुंचे। सिविल सर्जन द्वारा पीड़ित परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्स सफाई कर्मी की नौकरी दिलाने, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और निजी अस्पताल एमजीएम पर कड़ी कार्रवाई करने के आश्वासन के बाद ही शाम को प्रदर्शन समाप्त हो सका।
इस धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक प्रतिनिधि सह पूर्व मुखिया दिनेश राम, मुखिया प्रतिनिधि महेश्वर राम, जिला परिषद सदस्य मोहन पासवान, प्रमुख प्रतिनिधि रामाशीष प्रसाद, भाजपा नेत्री अनीता गुप्ता, राजेश मेहता, मिथिलेश प्रसाद, सुभाष चंद्र मेहता, झामुमो नेता आनंद प्रकाश, तेज बहादुर सिंह, दीनानाथ पांडेय, नकछेदी राम, कांत राम, प्यारी सिंह, दिलबर कुमार, रवि सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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