
Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में मानसून की दस्तक के करीब 20 दिन बाद भी शहर के प्रमुख जलाशय पूरी तरह नहीं भर सके हैं। गेतलसूद, हटिया और गोंदा डैम का जलस्तर पिछले साल की तुलना में काफी कम है। यदि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो राजधानी में पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
रांची की जलापूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत गेतलसूद डैम है। वर्तमान में इसका जलस्तर करीब 19 फीट है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 31 फीट था। पिछले 15 दिनों में डैम का जलस्तर केवल 16 फीट से बढ़कर 19 फीट तक पहुंच पाया है। अधिकारियों का मानना है कि जलस्तर में यह बढ़ोतरी अपेक्षा से काफी कम है।
हटिया और गोंदा डैम की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। पिछले वर्ष छह जुलाई तक हटिया डैम में करीब 32 फीट पानी था, जबकि इस बार यह लगभग 25 फीट पर है। वहीं गोंदा डैम का जलस्तर पिछले साल 23 फीट था, जो इस बार घटकर 17.6 फीट रह गया है। तीनों प्रमुख जलाशयों में पानी कम होने से संबंधित विभागों की चिंता बढ़ गई है।
जल संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सभी प्रमुख डैमों के स्कावर और रेडियल गेट की तकनीकी जांच पूरी कर ली है। जरूरत पड़ने पर गेट खोले जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल कम जलस्तर को देखते हुए पानी के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर स्थिति सुधर सकती है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूरे झारखंड में अब तक सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। गढ़वा में सबसे अधिक 89 प्रतिशत वर्षा की कमी रही है, जबकि गोड्डा में 79 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं रांची, सिमडेगा और दुमका में सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे इन जिलों की स्थिति अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।
गेतलसूद डैम के कार्यपालक अभियंता प्रदीप भगत ने बताया कि डैम में लगातार बढ़ रही गाद भी जलसंकट का एक बड़ा कारण बन रही है। डैम का अधिकतम जलस्तर 36 फीट है, लेकिन अनुमान है कि करीब 14 फीट तक गाद जमा हो चुकी है। डैम बनने के बाद से अब तक बड़े स्तर पर गाद की सफाई नहीं की गई है। केवल किनारों पर सीमित सफाई की गई, जिससे जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार डैम से गाद हटाने के लिए विभागीय स्तर से कई बार प्रस्ताव और पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक मानसून की अच्छी बारिश पर निर्भर बनी हुई है।
जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख मोतीलाला पिंगुआ ने बताया कि हटिया और गोंदा डैम पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधीन हैं, जबकि गेतलसूद डैम जल संसाधन विभाग के पास है। उन्होंने कहा कि गेतलसूद डैम के स्कावर और रेडियल गेट को आवश्यकता पड़ने पर खोलने की पूरी तैयारी है, लेकिन फिलहाल कम बारिश के कारण चिंता बनी हुई है।

