
Ranchi : भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रांची की एक पीएचडी छात्रा ने संस्थान प्रबंधन पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से होने के कारण कथित भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया है। छात्रा ने इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का भरोसा दिया है।
आईआईएम रांची की पीएचडी स्कॉलर प्रियंका कुजूर अपने माता-पिता के साथ रांची स्थित सर्किट हाउस पहुंचीं, जहां उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से मुलाकात कर अपनी शिकायत सौंपी।
प्रियंका कुजूर का आरोप है कि आदिवासी समुदाय से होने के कारण उन्हें संस्थान में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह बीआईटी मेसरा से स्नातक हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बार-बार कमजोर बताकर ताने दिए जाते हैं। उनका यह भी आरोप है कि मूल्यांकन के दौरान उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया गया और अंक देने में भी भेदभाव किया गया।
छात्रा के माता-पिता ने भी संस्थान के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार मानसिक दबाव और कथित भेदभाव के कारण उनकी बेटी अवसाद की स्थिति में पहुंच सकती है। उन्होंने आयोग से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि 7 जुलाई को आईआईएम रांची में प्रस्तावित समीक्षा बैठक के दौरान इस मामले को उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो, चाहे वह आईआईएम रांची हो या देश का कोई अन्य शैक्षणिक संस्थान।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम इन दिनों झारखंड दौरे पर है। आयोग राज्यभर से अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है। रविवार को रांची सर्किट हाउस में आयोग ने 15 मामलों की सुनवाई की, जबकि सोमवार को रिम्स और आईआईएम रांची में समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जहां विभिन्न शिकायतों की समीक्षा की जाएगी।
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