
Ranchi : राजधानी रांची स्थित रिम्स परिसर और डीआईजी मैदान क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में केंद्रीय सरना समिति की अध्यक्ष निशा भगत को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में जमानत का विरोध किया। सरकार का कहना था कि वर्ष 2025 में हाई कोर्ट के निर्देश पर रिम्स परिसर और डीआईजी मैदान क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान निशा भगत ने पुलिस के कार्य में बाधा डाली और सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसी आधार पर उनकी अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निशा भगत को अग्रिम जमानत देने का आदेश पारित किया। अदालत के इस फैसले के बाद उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में रिम्स परिसर और डीआईजी मैदान क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने अभियान चलाया था। इस दौरान कार्रवाई का विरोध करते हुए निशा भगत बुलडोजर के सामने लेट गई थीं और अभियान रोकने की मांग कर रही थीं। मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। बाद में पीआर बॉन्ड पर उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस घटना के बाद रांची सदर थाना में सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कांड संख्या 608/2025 दर्ज किया गया था। वहीं, निशा भगत ने भी आरोप लगाया था कि कार्रवाई के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने उनके साथ मारपीट की और उनके कपड़े फाड़ दिए थे। उस समय इस घटना को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी विरोध जताया था।
अब हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद निशा भगत को कानूनी राहत मिल गई है। हालांकि, मामले की पुलिस जांच जारी है और विवेचना पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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