
Ranchi : झारखंड राज्य कॉपरेटिव बैंक से जुड़े कथित 50 करोड़ रुपये के घोटाले में नया खुलासा सामने आया है। आरोप है कि घोटाले में शामिल बड़े अधिकारियों को बचाने के उद्देश्य से बैंक की बैलेंस शीट में हेराफेरी की गई। वर्ष 2018 की बैलेंस शीट में चेक परचेज मद में दर्ज करीब 16.29 करोड़ रुपये की राशि को वर्ष 2019 की बैलेंस शीट से पूरी तरह गायब कर दिया गया। इस पूरे मामले की जांच फिलहाल सीआईडीऔर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अपने-अपने स्तर पर कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सरायकेला कॉपरेटिव बैंक में करीब 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने जांच कराई थी। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। रिपोर्ट में व्यापारी संजय डालमिया को नियमों के विपरीत ऋण देने और चेक परचेज के नाम पर करोड़ों रुपये जारी करने का मामला भी शामिल था।
जांच में सामने आया कि बैंक में चेक परचेज की कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं होने के बावजूद वर्ष 2018 में संजय डालमिया को लगभग 15.44 करोड़ रुपये चेक परचेज के नाम पर उपलब्ध करा दिए गए। बताया गया कि डालमिया ने दावा किया था कि उसे बड़े ठेके मिले हैं और भुगतान प्राप्त होने पर बैंक उसके खाते से राशि समायोजित कर ले। हालांकि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बैंक को कोई वास्तविक चेक उपलब्ध नहीं कराया गया था।
आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने केवल आवेदन के आधार पर इतनी बड़ी रकम जारी कर दी और यह राशि सीधे डालमिया के खाते में न जाकर उससे जुड़ी कंपनियों पिंटू इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड तथा एसकेएम इंफ्रावेंचर प्राइवेट लिमिटेड के खातों में स्थानांतरित कर दी गई।
सरकारी जांच के दौरान बैंक प्रबंधन पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगा। जांच टीम को वह चेक भी नहीं मिला, जिसके आधार पर भुगतान का दावा किया गया था। जांच समिति ने इस पूरे प्रकरण को बैंक अधिकारियों और संबंधित कारोबारी के बीच कथित मिलीभगत से किया गया गबन बताया।
इस मामले में स्थानीय थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई थीं, जिनमें बैंक के कई तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया। आरोप है कि बाद में मामले को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड में भी बदलाव किया गया।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2018 की बैलेंस शीट के प्वाइंट नंबर 59 में चेक परचेज मद के तहत 16.29 करोड़ रुपये दर्ज थे, जबकि वर्ष 2019 की बैलेंस शीट में उसी मद के सामने शून्य अंकित कर दिया गया। वहीं, इस राशि की वसूली या समायोजन का कोई स्पष्ट विवरण बैलेंस शीट में दर्ज नहीं मिला। इसी आधार पर बैलेंस शीट में हेराफेरी कर मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों को बचाने की आशंका जताई जा रही है।
Read also हेमंत सरकार में कानून-व्यवस्था ध्वस्त, अवैध खनन की काली कमाई सीधे सत्ता के शीर्ष तक : बाबूलाल मरांडी

