
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को झारखंड की राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में झंडोत्तोलन के बाद अपने मुख्य संबोधन में झारखंड के अगले 25 वर्षों के विकास का विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी तय करने का दिन है।
झारखंड के महान जननायकों की विरासत को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और सामाजिक न्याय पर आधारित विकास मॉडल से बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलित जीवन की दृष्टि झारखंड की पुरानी परंपरा रही है।
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का रास्ता तलाश रही है। ऐसे में झारखंड की पारंपरिक जीवन पद्धति और ज्ञान पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी, चांद-भैरव, फूलो-झानो समेत राज्य के महान नायकों ने सम्मान, समानता, सामुदायिक सहभागिता और प्रकृति के प्रति संवेदनशील समाज का सपना देखा था।
युवाओं, स्थानीय संसाधनों और रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 25 वर्षों के झारखंड की सबसे बड़ी ताकत राज्य के युवा होंगे। आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, कौशल और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने पर सरकार का विशेष जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की भाषाओं, साहित्य, लोककला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ लाह, तसर, बांस, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज को मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर लाखों परिवारों की आय का आधार बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल खनिजों का दोहन नहीं है। मानव संसाधन, प्राकृतिक संसाधन और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन जरूरी है। आने वाले वर्षों में झारखंड देश के सामने यह उदाहरण पेश करेगा कि विकास और प्रकृति, आधुनिकता और परंपरा तथा उद्योग और पर्यावरण के बीच टकराव के बजाय संतुलन कायम किया जा सकता है।
कृषि को लाभकारी बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने किसानों को राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य खेती को केवल सहारा देना नहीं, बल्कि उसे लाभकारी बनाना है। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत राज्य में लगभग 2.15 हजार एकड़ में वृक्षारोपण और करीब तीन लाख परिवारों को आजीविका के नए माध्यमों से जोड़ने की बात उन्होंने कही। योजना के तहत उत्पादित आम का विदेशों में निर्यात भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसान केवल धान उत्पादक बनकर नहीं रहेंगे, बल्कि कृषि उद्यमी बनेंगे। फल-सब्जी, बागवानी, डेयरी, मत्स्य, कुक्कुट, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, लाह, तसर, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति दी जाएगी।
16 लाख एमएसएमई, 60 लाख से ज्यादा रोजगार
मुख्यमंत्री ने छोटे उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और हस्तशिल्पियों को राज्य की आर्थिक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड में वर्तमान में 16 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम हैं। इनमें आठ लाख से अधिक सूक्ष्म इकाइयां हैं, जो 60 लाख से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार करना चाहती है, जिसमें स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचें, हर जिले में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग विकसित हों और युवाओं को अपने ही जिले में सम्मानजनक रोजगार मिले।
एक लाख करोड़ के निवेश के लिए 10 समझौते
मुख्यमंत्री ने हाल में नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग, पर्यटन, आईटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधारभूत संरचना और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश और नवाचार पर व्यापक चर्चा हुई। सरकार के प्रयासों से प्रमुख कॉरपोरेट समूहों के साथ लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए 10 समझौते हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से राज्य के 22 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर
महिलाओं को विकास की महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता को बढ़ावा मिला है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव तक मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता का आधार है। सरकार आधुनिक अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग शिक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, टेलीमेडिसिन और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रही है।
उन्होंने पंचायत स्तर पर दवा दुकानों के साथ सभी पंचायतों में समर्पित एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के संकल्प की बात कही। इसका संचालन स्थानीय ग्राम एवं पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी आरआईएमएस-2 का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और धनबाद में छह नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण की कार्रवाई चल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा। बीमारी के इलाज के साथ रोकथाम, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य जागरूकता पर भी सरकार का जोर रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के 80 वर्ष और झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने के इस पड़ाव पर राज्य को अगले 25 वर्षों की दिशा तय करनी है। उनका सपना ऐसा झारखंड बनाने का है, जहां विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, झारखंडी अस्मिता और आधुनिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़े और प्राकृतिक संसाधनों का लाभ सबसे पहले झारखंड के लोगों को मिले।


