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Jharkhand Tree Rakhi Campaign : रक्षाबंधन पर झारखंड के 700 गांवों में एक लाख पेड़ों को बांधी जाएगी राखी, जानें कितने महीने चलेगा पेड़ बचाओ अभियान

by Rakesh Pandey
Jharkhand Tree Rakhi Campaign
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रांची : रक्षाबंधन के पर्व पर झारखंड में प्रकृति संरक्षण को भावनात्मक जनअभियान से जोड़ने की अनूठी पहल की जाएगी। राज्य के 700 गांवों में हजारों ग्रामीण शुक्रवार को करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा और संरक्षण का संकल्प लेंगे। यह अभियान पेड़ बचाओ पहल के तहत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को पेड़ों और पर्यावरण से भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए वन संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन से शुरू होने वाला यह अभियान एक महीने तक चलेगा। इस दौरान झारखंड के सभी 24 जिलों के चिन्हित गांवों में करीब तीन लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान की शुरुआत गुमला जिले के जोराड़ गांव से होगी, जहां प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्वयं एक पेड़ को राखी बांधकर इसकी शुरुआत करेंगे।

झारखंड के 700 गांवों में एक लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य

पेड़ बचाओ अभियान के तहत रक्षाबंधन के दिन झारखंड के 700 गांवों में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण पेड़ों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लेंगे। वन विभाग का लक्ष्य है कि शुक्रवार को करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधी जाए।

इसके बाद अभियान लगातार एक महीने तक जारी रहेगा। इस अवधि में राज्य के 24 जिलों में करीब तीन लाख पेड़ों को राखी बांधने की योजना बनाई गई है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को पेड़ों के संरक्षण, वन संपदा की सुरक्षा और पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी से जोड़ा जा रहा है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है, जिसमें रक्षा का संकल्प लिया जाता है। इसी भावना को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए पेड़ों की रक्षा का संकल्प दिलाया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों और प्रकृति के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना है।

गुमला के जोराड़ गांव से पेड़ बचाओ अभियान की शुरुआत

रक्षाबंधन के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत गुमला जिले के जोराड़ गांव से की जाएगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार स्वयं एक पेड़ को राखी बांधकर अभियान का शुभारंभ करेंगे।

वन विभाग का मानना है कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है। पौधों और पेड़ों की नियमित देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण भी जरूरी है। इसी सोच के साथ ग्रामीणों को अभियान से जोड़कर पेड़ों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वर्ष 2004 में धनबाद के लुकैया गांव से शुरू हुई थी पहल

पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेने की यह पहल वर्ष 2004 में धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के लुकैया गांव से शुरू हुई थी। उस समय यह क्षेत्र माओवाद प्रभावित इलाकों में शामिल था।

संजीव कुमार के अनुसार, इस पहल के माध्यम से धीरे-धीरे ग्रामीणों को प्रकृति और वन संरक्षण से जोड़ा गया। अब तक झारखंड के 12,000 से अधिक गांव इस कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं।

लुकैया गांव में इस अभियान के जरिए 20,000 से अधिक महुआ के पेड़ों को संरक्षित किया गया। इन पेड़ों का अब ग्रामीणों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान है। महुआ और अन्य लघु वनोपज के संरक्षण से कई गांवों के लोगों को अतिरिक्त आय का साधन भी मिला है।

पेड़ बचाओ अभियान से ग्रामीणों की आजीविका को भी मिला सहारा

पेड़ बचाओ अभियान का प्रभाव केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहा है। वन संपदा के संरक्षण से ग्रामीण क्षेत्रों में लघु वनोपज के उत्पादन को बढ़ावा मिला है। इससे कई गांवों के लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली है।

ग्रामीणों को जब पेड़ों के आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व से जोड़ा गया तो संरक्षण के प्रति उनकी भागीदारी भी बढ़ी। महुआ समेत अन्य वन संपदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरी है।

झारखंड के वन क्षेत्र में 1,128 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि

प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कई वर्षों से झारखंड के वन क्षेत्र में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वन विभाग और जनभागीदारी से चलाए गए संरक्षण अभियानों का असर राज्य के वन क्षेत्र पर भी दिखाई दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 से पिछले दो दशकों के दौरान झारखंड के वन क्षेत्र में 1,128 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। पेड़ों के संरक्षण और पौधारोपण के साथ उनकी देखभाल पर जोर दिए जाने से वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर

इस महीने आयोजित 77वें वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया था। उन्होंने कहा था कि पर्यावरण और प्रकृति की सुरक्षा के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को निर्देश दिया था कि विभाग केवल पौधारोपण अभियान तक सीमित न रहे। नए लगाए गए पौधों में खाद देने, उनकी नियमित देखभाल करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाए।

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