
रांची : झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसईआरसी) ने राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से झारखंड स्टेट ग्रिड कोड विनियम, 2026 लागू किया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। नए नियमों के तहत राज्य के बिजली ग्रिड की योजना, विकास, रखरखाव और संचालन के लिए विस्तृत मानक और प्रक्रियाएं तय की गई हैं।
नए स्टेट ग्रिड कोड के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर समन्वय बैठक में भी चर्चा होगी। इसमें राज्य पारेषण इकाई, राज्य लोड डिस्पैच सेंटर, बिजली उत्पादन कंपनियों, ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारियों पर विचार किया जाएगा।
कोड के अनुसार सभी उपयोगकर्ताओं और ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों को कनेक्शन एग्रीमेंट के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं अपने स्तर पर उपलब्ध करानी होंगी। बिजली व्यवस्था की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए बिजली प्रवाह, वोल्टेज, स्विचों की स्थिति और ट्रांसफार्मर टैप जैसे महत्वपूर्ण परिचालन आंकड़ों की टेलीमीटरिंग की व्यवस्था भी करनी होगी। संबंधित एजेंसियों को इन आंकड़ों को राज्य लोड डिस्पैच सेंटर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक संचार प्रणाली स्थापित करनी होगी।
नए नियमों में बिजली उत्पादन इकाइयों और पावर स्टेशनों के लिए भी कड़े तकनीकी मानक तय किए गए हैं। उत्पादन इकाइयों को निर्धारित आवृत्ति और वोल्टेज सीमा के भीतर लगातार बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होना होगा। साथ ही सुरक्षा उपकरणों और स्वचालित वोल्टेज नियंत्रण प्रणाली की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी।
ग्रिड की आवृत्ति में अचानक कमी आने की स्थिति में बड़ी बिजली उत्पादन इकाइयों को तत्काल उत्पादन बढ़ाकर ग्रिड को संभालने में योगदान देना होगा। कोयला और लिग्नाइट आधारित 200 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले संयंत्रों समेत निर्धारित गैस, जलविद्युत और अन्य बिजली उत्पादन स्रोतों के लिए प्राथमिक प्रतिक्रिया की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को जरूरत पड़ने पर अपने मौजूदा उत्पादन स्तर में तत्काल वृद्धि करने की क्षमता रखनी होगी।
इसी प्रकार ग्रिड की आवृत्ति बढ़ने पर बिजली उत्पादन को नियंत्रित और कम करने के भी प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं करने वाले बिजलीघरों को राज्य लोड डिस्पैच सेंटर की अनुमति के बिना क्षेत्रीय ग्रिड के साथ संचालन की अनुमति नहीं होगी।
नए कोड में बिजली संयंत्रों के उत्पादन को बढ़ाने और घटाने की गति के लिए भी मानक तय किए गए हैं। कोयला और लिग्नाइट आधारित संयंत्रों, गैस आधारित बिजलीघरों तथा जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी क्षमता के अनुरूप उत्पादन में तेजी से बदलाव करने की व्यवस्था रखनी होगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए इन प्रावधानों का सबसे बड़ा महत्व बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाना है। ग्रिड में अचानक तकनीकी खराबी या आवृत्ति में बड़े बदलाव की स्थिति में उत्पादन और पारेषण व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय से बड़े व्यवधान और ब्लैकआउट की आशंका कम करने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि नया स्टेट ग्रिड कोड झारखंड की बिजली व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अधिक मजबूत, सुरक्षित और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

