
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में बंद पड़ी झींकपानी स्थित ACC कंपनी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। गुरुवार को चाईबासा परिसदन के पोड़ाहाट कक्ष में झींकपानी, दोकट्टा और आसपास के गांवों के सैकड़ों स्थायी, अस्थायी कर्मचारी, मजदूर और प्रभावित रैयतों ने राजस्व, निबंधन, भूमि सुधार एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई।
दोकट्टा के ग्रामीण रैयत तुराम बिरूली ने मंत्री के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ACC प्रबंधन कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है। कंपनी बंद होने के नाम पर क्लोजर नोटिस दिखाकर कर्मचारी पोर्टल के जरिए जबरन BRS (Benefit Reduction Scheme) पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इससे 65 स्थायी और करीब 1500 अस्थायी व कॉन्ट्रैक्ट मजदूर प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन देने के बावजूद न तो उन्हें उचित मुआवजा मिला और न ही नौकरी में स्थायी हक।
शिकायत सुनने के बाद मंत्री दीपक बिरुवा ने मीडिया को बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ACC कंपनी ने जो क्लोजर नोटिस दिया था, उसे भारत सरकार ने पहले ही अस्वीकार कर दिया है। इसके बावजूद प्रबंधन कॉन्ट्रैक्ट वर्करों और जमीन देने वाले रैयतों को क्लोजर का डर दिखाकर धोखे से BRS पर साइन करा रहा है। इसकी जानकारी सरकार को भी है।
मंत्री ने कहा कि प्रभावित मजदूरों और रैयतों को उचित टैक्स रिबेट और मुआवजा मिलना चाहिए, जो कंपनी नहीं दे रही है। यह सरासर अन्याय है। उन्होंने मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा जाएगा और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा।
इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर ACC प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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