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Jharkhand Forest Department : रिटायरमेंट व एक्सटेंशन खत्म होने के बाद भी अफसरों से काम लेने पर सरकार सख्त, वन विभाग ने लगाई रोक; मानगो व दलमा रेंजर पर भी असर

Jharkhand Forest Department : सरकार के अवर सचिव भन्नु चौधरी की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), झारखंड को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सेवा विस्तार खत्म होने के बाद भी ऐसे अफसरों से काम लिया जा रहा है।

by Anurag Ranjan
Retirement and extension rules affect Mango and Dalma forest rangers
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जमशेदपुर : झारखंड के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में सेवानिवृत्ति और सेवा विस्तार समाप्त होने के बावजूद अधिकारियों से काम लेने के गंभीर मामले पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि जिन सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षकों (एसीएफ) और वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) की सेवा विस्तार अवधि समाप्त हो चुकी है, उनसे तत्काल प्रभाव से कोई भी सरकारी कार्य न लिया जाए और न ही उन्हें किसी प्रकार का भुगतान किया जाए।

सरकार के अवर सचिव भन्नु चौधरी की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), झारखंड को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सेवा विस्तार खत्म होने के बाद भी ऐसे अफसरों से काम लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, वे वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमानुकूल नहीं है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के कृत्य से भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन और पद के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आदेश में कहा गया है कि सक्षम स्तर की अनुमति के बिना किसी भी सेवानिवृत्त अफसर से काम नहीं लिया जाएगा।

मानगो और दलमा रेंजर भी दायरे में

इस आदेश का सीधा असर कोल्हान क्षेत्र, विशेषकर जमशेदपुर के वन प्रभागों पर पड़ने जा रहा है। क्याेंकि मानगो के रेंजर दिग्विजय सिंह और दलमा के रेंजर दिनेश चंद्रा भी इसी श्रेणी में शामिल हैं। दोनों अधिकारी अपनी विधिवत सेवानिवृत्ति के बाद भी बार-बार सेवा विस्तार पा रहे थे और अवधि पूरी होने के बावजूद अपने पदों पर बने रहकर विभागीय कार्यों व वित्तीय मामलों का संचालन कर रहे थे। मिली जानकारी के अनुसार दिग्विजय सिंह दाे बार एक्टेंशन ले चुके हैं अाैर तीसरी बार लेने का इंतजार कर रहे हैं। इसी प्रकार दिनेश चंद्रा भी एक एक बार एक्टेंशन ले चुके हैं। विभाग द्वारा जारी इस सख्त आदेश के बाद अब ऐसे तमाम अधिकारियों की कुर्सी पर संकट तय है। सभी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक और सभी डीएफओ को आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

सीईसी के सख्ती के बाद फैसला

मालूम हाे कि हाल ही में दलमा वाइल्ड लाईफ सेंचुरी में बनाए जा रहे 15 कराेड़ के ईकाे काॅलेज पर नियमाें का उल्लंघन किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने गंभीर टिप्पणी की है। कमेटी ने जहां काॅटेज के निर्माण पर राेक लगा दिया वहीं इसे लेकर कई बिंदुअाें पर सरकार से सवाल भी पूछा है। इससे सरकार की काफी किरकिरी हुई है। इसके बाद ही वन विभाग के अधिकारियाें की मनमर्जी पर राेक लगाने के लिए सरकार ने यह कार्रवाई शुरू की है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार इस निर्माण काे स्वीकृति देने वाले बड़े अधिकारियाें के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

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