
Jamshedpur : टाटा स्टील ने कम-कार्बन इस्पात उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ब्लास्ट फर्नेस में कोक ओवन गैस (COG) इंजेक्शन तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है। टेक्नोलॉजी पार्टनर मेसर्स पॉल वुर्थ-SMS और इक्विपमेंट सप्लायर मेसर्स कोबेल्को के सहयोग से यह तकनीक ब्लास्ट फर्नेस के ट्यूयर्स के माध्यम से लागू की गई है।
हाइड्रोकार्बन से भरपूर बाय-प्रोडक्ट गैस COG का आमतौर पर बिजली उत्पादन और हीटिंग में उपयोग किया जाता है अथवा इसे फ्लेयरिंग के जरिए जला दिया जाता है। टाटा स्टील ने इस गैस के उपयोग का एक अधिक टिकाऊ विकल्प विकसित करते हुए इसे ब्लास्ट फर्नेस में जीवाश्म ईंधन के स्थान पर रिडक्टेंट के रूप में इस्तेमाल किया है। इससे जीवाश्म ईंधन की खपत और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।
कंपनी के अनुसार, COG इंजेक्शन तकनीक ब्लास्ट फर्नेस को तीन-ईंधन प्रणाली के साथ संचालित करने का अवसर भी प्रदान करती है। इससे उत्पादन प्रक्रिया में ईंधन के उपयोग में अधिक लचीलापन आने के साथ परिचालन दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, उन्नत इंजेक्शन तकनीक का सुरक्षित और स्थिर संचालन कम-कार्बन इस्पात उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी ने कहा कि यह पहल ग्रीन स्टील उत्पादन के क्षेत्र में उसकी तकनीकी क्षमता और नेतृत्व को और मजबूत करेगी।
टाटा स्टील ब्लास्ट फर्नेस में कम-कार्बन तकनीकों के इस्तेमाल की दिशा में लगातार काम कर रही है। कंपनी इससे पहले ब्लास्ट फर्नेस में कोल बेड मीथेन, हाइड्रोजन और बायोचार इंजेक्शन का सफल प्रदर्शन भी कर चुकी है। COG इंजेक्शन इसी क्रम में कम-कार्बन और अधिक टिकाऊ इस्पात उत्पादन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण तकनीकी पहल है।

