
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल के 1.60 लाख रुपये के बीमा दावे को लेकर दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने Cholamandalam M.S. General Insurance Company Limited के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि हादसे के समय उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था।सी.सी. केस संख्या 07/2025 का पूरा विवरण में यह फैसला उपभोक्ता मामले के केस संख्या 07/2025 से संबंधित है।
क्या है मामला
संस्थापन तिथि 22 फरवरी 2025,अंतिम सुनवाई 29 अगस्त 2026 निर्णय घोषणा तिथि 10 सितंबर 2026 को फैसला हुआ। शिकायतकर्ता खुदीराम मुर्मू पिता मिर्जा मुर्मू निवासी पुलिस लाइन चाईबासा, जिला पश्चिमी सिंहभूम ने Cholamandalam M.S. General Insurance Company Limited, चाईबासा शाखा के खिलाफ यह परिवाद दर्ज कराया था।
घटना का पृष्ठभूमि और बीमा दावा
मामला मोटरसाइकिल संख्या JH-05-DF-3222 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2 अगस्त 2023 को गालूडीह पुल के समीप एक बोलेरो पिकअप वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी थी। घटना के संबंध में गालूडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वाहन का बीमा Cholamandalam M.S. General Insurance Company Limited द्वारा जारी किया गया था, जिसकी पॉलिसी अवधि 5 सितंबर 2022 से 4 सितंबर 2023 तक वैध थी।दुर्घटना के पश्चात शिकायतकर्ता ने वाहन मरम्मत खर्च के मद में 1.60 लाख रुपये का इंश्योरेंस क्लेम दायर किया, जिसे बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया।
बीमा कंपनी की दलील और वैध लाइसेंस का अभाव
कंपनी ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दुर्घटना के समय शिकायतकर्ता स्वयं बाइक चला रहा था और उसके पास कोई वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद नहीं था। यह पॉलिसी के अनिवार्य नियमों और शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान खुदीराम मुर्मू ने स्वीकार किया कि उसके पास दुर्घटना के समय ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। बीमा कंपनी की आपत्ति के बाद भी वह कोई वैध लाइसेंस या परिवहन प्राधिकरण से जुड़ा रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर आयोग ने टिप्पणी की कि केवल बीमा पॉलिसी और दुर्घटना का होना ही दावा स्वीकार करने के लिए पर्याप्त नहीं है; ‘Own Damage Claim’ के लिए पॉलिसी की शर्तों का निष्ठापूर्वक पालन करना भी अनिवार्य है।
साक्ष्यों में विरोधाभास और अधूरे दस्तावेज
आयोग की सुनवाई के दौरान मामले में कई अन्य गंभीर खामियां भी उजागर हुईं।घटना तिथि में अंतर में शिकायतकर्ता ने दुर्घटना की तारीख 2 अगस्त 2023 बताई, जबकि बीमा कंपनी ने 22 जुलाई 2023 की तारीख का उल्लेख किया। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत अस्पताल के पर्चों और दस्तावेजों में भी 22 जुलाई 2023 दर्ज थी, जिसका कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब शिकायतकर्ता नहीं दे पाया।अस्पष्ट जीएसटी बिल: मरम्मत में खर्च दर्शाए गए 1.60 लाख रुपये के समर्थन में जमा किया गया GST बिल पढ़ने योग्य नहीं था।सर्वेयर रिपोर्ट का न होना: दावे के समर्थन में कोई अधिकृत सर्वेयर रिपोर्ट, अंतिम मरम्मत बिल या अन्य प्रामाणिक साक्ष्य आयोग के समक्ष पेश नहीं किए गए।
आयोग का अंतिम निर्णय
मामले के सभी तथ्यों, विरोधाभासों और साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता बीमा अनुबंध की अनिवार्य शर्तों और अपनी दावा राशि को साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहा। अतः Cholamandalam M.S. General Insurance Company Limited के विरुद्ध सेवा में किसी भी प्रकार की कमी सिद्ध नहीं होती है।
उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता के 1.60 लाख रुपये के बीमा दावे की याचिका को पूर्ण रूप से खारिज कर दिया।

