
Jamshedpur : झारखंड और पश्चिम बंगाल सीमा पर पिछले दो दशकों से सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना खूंखार माओवादी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। भाकपा (माओवादी) के इस रीजनल कमेटी सदस्य और एरिया कमांडर ने अपनी 10 लाख की इनामी नक्सली पत्नी मीता के साथ कोलकाता में पुलिस के सामने घुटने टेक दिए हैं।
झारखंड सरकार ने सचिन पर 15 लाख रुपये और उसकी पत्नी मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इस बड़े आत्मसमर्पण को झारखंड-बंगाल सीमांत क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के खात्मे की दिशा में सुरक्षाबलों की एक ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।
सांसद सुनील महतो हत्याकांड का था मास्टरमाइंड
सचिन 4 मार्च 2007 को घाटशिला के बागुड़िया में हुए बहुचर्चित सांसद सुनील महतो हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। एक फुटबॉल मैच के दौरान जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद की नृशंस हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से ही सीबीआई और झारखंड पुलिस को बरसों से उसकी तलाश थी। सचिन को माओवादियों के 1 करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर असीम मंडल उर्फ आकाश के दस्ते का सबसे खास रणनीतिकार और हथियारों का मुख्य संचालक माना जाता था।
दालमा से जंगलमहल तक फैला था खौफ का साम्राज्य
पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोड़ाम, एमजीएम से लेकर पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम और पुरुलिया (जंगलमहल) तक सचिन का भारी खौफ था। उस पर दर्जनों नक्सली वारदातों, लेवी (रंगदारी) वसूली और सुरक्षाबलों पर बारूदी सुरंग हमलों के गंभीर मामले दर्ज हैं।
हाल के दिनों में सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाई गई सख्त घेराबंदी के बाद सचिन अपने दस्ते के साथ दलमा और सीमावर्ती इलाकों में छिपने की फिराक में था। लेकिन झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) और बंगाल एसटीएफ (STF) की संयुक्त कार्रवाई व सटीक खुफिया तंत्र के आगे उसकी एक न चली और उसका पूरा लॉजिस्टिक नेटवर्क ध्वस्त हो गया।
माओवादी संगठन की टूटी कमर, खुलेंगे कई बड़े राज
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 1 करोड़ के इनामी असीम मंडल दस्ते से सचिन जैसे कद्दावर कैडर का अलग होना इलाके में माओवादी संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका है। इस सरेंडर के बाद अब सुनील महतो हत्याकांड सहित कई अनसुलझे मामलों, नक्सली ठिकानों और उनके मददगारों के कई बड़े व महत्वपूर्ण राज सामने आने की उम्मीद है।

