
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूरवर्ती और नेटवर्क शैडो क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करने को लेकर जिला समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मनोहरपुर विधायक जगत माझी, उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेनू, सारंडा, पोड़ाहाट, चाईबासा और कोल्हान वन प्रमंडल के पदाधिकारी, अपर उपायुक्त, सहायक समाहर्ता सहित जियो, बीएसएनएल और एयरटेल कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विधायक जगत माझी ने कहा कि गुदड़ी और बंदगांव प्रखंड के सुदूर गांवों में लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट आम लोगों की मूलभूत जरूरत बन गया है। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बैंकिंग और सरकारी डिजिटल सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को आसानी से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जिले में नक्सल गतिविधियों में कमी आने से विकास का माहौल बना है, ऐसे में सुदूर क्षेत्रों को संचार व्यवस्था से जोड़ना विकास की अगली बड़ी कड़ी है। उन्होंने दूरसंचार कंपनियों और संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर तय समय में नेटवर्क बहाल करने का आग्रह किया।
बैठक में जिले की वर्तमान नेटवर्क व्यवस्था की समीक्षा की गई और नेटवर्क शैडो एरिया को चिन्हित कर उसे खत्म करने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से गुदड़ी और बंदगांव के सुदूर क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या को प्राथमिकता पर दूर करने का निर्णय लिया गया। दूरसंचार कंपनियों को निर्देश दिया गया कि अगले 90 दिनों के भीतर चिन्हित क्षेत्रों में नेटवर्क बहाली के लिए जरूरी कदम उठाएं।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण और वनवर्ती क्षेत्रों में मजबूत संचार व्यवस्था उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। बेहतर नेटवर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवा, बैंकिंग, सरकारी सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी। उन्होंने सभी विभागों और कंपनियों को मिशन मोड में काम कर तय समय में परिणाम देने का निर्देश दिया।
बैठक में यह भी तय हुआ कि दूरसंचार कंपनियां गुदड़ी, बंदगांव और अन्य शैडो क्षेत्रों का तकनीकी और स्थलीय सर्वेक्षण कर ऐसे स्थानों को चिन्हित करेंगी जहां नए टावर या अन्य तकनीक से नेटवर्क दिया जा सके। सर्वे के बाद प्राथमिकता के आधार पर टावर स्थलों का चयन कर स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वन क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। वन प्रमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रस्तावित टावर स्थलों के लिए आवश्यक वन प्रमाण-पत्र, अनापत्ति प्रमाण-पत्र और अन्य स्वीकृतियों की प्रक्रिया प्राथमिकता पर पूरी करें। जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि सर्वे से लेकर टावर स्थापना तक में देरी न हो।
पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों में बेहतर नेटवर्क आम लोगों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा और आपातकालीन संचार व्यवस्था के लिए भी जरूरी है। मजबूत कनेक्टिविटी से पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना का आदान-प्रदान और समन्वय और बेहतर होगा।
बैठक में कार्ययोजना के तहत चार चरण तय किए गए। पहले चरण में शैडो क्षेत्रों का सर्वे और मैपिंग, दूसरे चरण में तकनीकी रूप से उपयुक्त टावर स्थलों का चयन, तीसरे चरण में वन विभागीय प्रमाण-पत्र और अन्य स्वीकृतियां पूरी करना और चौथे चरण में टावर स्थापना, उपकरण संयोजन और नेटवर्क परीक्षण का कार्य किया जाएगा। जिला प्रशासन पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करेगा।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि कार्ययोजना की प्रगति की नियमित रिपोर्ट जिला प्रशासन को दी जाए और 90 दिनों के भीतर अधिकतम शैडो क्षेत्रों को कवर करने का लक्ष्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि जिले के हर सुदूर क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ना समावेशी विकास की दिशा में अहम कदम है, जिसके लिए प्रशासन, वन विभाग, पुलिस और दूरसंचार कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।
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