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Jharkhand Culture : करम पर्व प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश देता है : राज्यपाल

by Nikhil Kumar
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रांची : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि करम पर्व प्रकृति के साथ गहरे संबंध और संतुलित जीवन का संदेश देता है। करम वृक्ष की डाली की स्थापना और पूजा तथा सामूहिक नृत्य-संगीत के माध्यम से मनाया जाने वाला यह पर्व झारखंड की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान है। राज्यपाल रविवार को बेड़ो, रांची में आयोजित करम पर्व पूर्व संध्या समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि करम पर्व से जुड़ी लोककथाएं अच्छे कर्म, परिश्रम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती हैं। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की जीवन-पद्धति का अभिन्न हिस्सा रहा है। आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में करम पर्व का प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है।

राज्यपाल ने कहा कि करम पर्व की परंपराएं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की प्रेरणा देती हैं। झारखंड की भाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, लोककलाएं और पारंपरिक ज्ञान राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण केवल परंपराओं को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का माध्यम भी है।

उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने तथा अपनी भाषा और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के साथ अपनी संस्कृति से जुड़े रहना हमारी पहचान को और मजबूत करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ ग्रामीण तथा वंचित वर्गों तक पहुंचाने के लिए आगे आना चाहिए। विकास के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की विशेषता इसकी बहुरंगी संस्कृति और सामाजिक सद्भाव में भी निहित है। यहां विभिन्न धर्मों, समुदायों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। पर्व-त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने, आपसी भाईचारे को मजबूत करने और सामाजिक समरसता बढ़ाने का काम करते हैं। ये भारत की ‘विविधता में एकता’ की महान परंपरा को भी सुदृढ़ करते हैं।

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