
रांची : झारखंड की राजधानी रांची में कांके के तत्कालीन अंचल अधिकारी और सेवानिवृत्त झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी दीपक कुमार के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही उनके निधन के बाद समाप्त कर दी गयी है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी किया है।
दीपक कुमार के खिलाफ कांके अंचल के मौजा कोंगे स्थित खाता संख्या 23, खेसरा संख्या 401 की 11.33 डिसमिल जमीन के नामांतरण को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी थी। आरोप था कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46(1)(बी) का उल्लंघन करते हुए अनुसूचित जाति के पुरन डोम की जमीन का नामांतरण सामान्य जाति के सुरेंद्र सिंह के नाम किया गया। इसे सरकारी सेवक आचार नियमावली के भी प्रतिकूल माना गया था।
मामले में स्पष्टीकरण और उपायुक्त, रांची के मंतव्य के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी। इसी दौरान विभागीय जांच-सह-संचालन पदाधिकारी ने विभाग को सूचित किया कि दीपक कुमार का 14 जुलाई 2026 को निधन हो गया है और विभागीय कार्यवाही से संबंधित अभिलेख वापस कर दिये गये हैं।
विभाग ने कहा है कि केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 20 अक्टूबर 1999 के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान आरोपित सरकारी सेवक की मृत्यु हो जाने और आरोप साबित नहीं होने की स्थिति में दंड देना उचित नहीं है। इसी आधार पर दीपक कुमार के खिलाफ संचालित विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी गयी।
हाईकोर्ट में 25 हजार जुर्माने के मामले में कुमार कनिष्क आरोप मुक्त
रांची : बोकारो के कार्यपालक दंडाधिकारी कुमार कनिष्क को न्यायालयीन मामले में लापरवाही के आरोप से विभाग ने मुक्त कर दिया है। हालांकि, भविष्य में न्यायालयीन मामलों में सतर्क रहने की चेतावनी दी गयी है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी किया है।
कुमार कनिष्क पर आरोप था कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ता के पक्ष में दो सितंबर 2024 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने के बावजूद उसकी प्रति याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट को उपलब्ध नहीं करायी गयी। इसके चलते अवमानना मामले में हाईकोर्ट ने 20 सितंबर 2024 को उपायुक्त, बोकारो की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया था।
विभागीय कार्यवाही के दौरान कुमार कनिष्क ने बताया कि आवेदक को दो सितंबर को ही प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सूचना दी गयी थी और तीन सितंबर को प्राप्ति रसीद भी उपलब्ध करा दी गयी थी। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट के 18 अक्टूबर 2024 के आदेश की प्रति भी प्रस्तुत की, जिसमें अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी गयी थी।
आरोप, स्पष्टीकरण और उपायुक्त के मंतव्य की समीक्षा के बाद विभाग ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। हालांकि, भविष्य में न्यायालयीन मामलों में पूरी सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गयी है।

