
रांची : झारखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ अब पुराने और खराब हो चुके इलेक्ट्रिक वाहनों को हटाने की व्यवस्था पर भी काम होगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोगी समय पूरा होने के बाद उनके निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद परिवहन विभाग इस व्यवस्था को लेकर आगे की तैयारी कर रहा है।
राज्य में फिलहाल 1,14,275 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। यह कुल पंजीकृत वाहनों का 1.30 प्रतिशत है। वहीं नये वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। 2026 में अब तक 35,346 बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए हैं। इस साल पंजीकृत कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 6.8 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। पिछले वर्ष यह करीब पांच प्रतिशत थी। इसमें बड़ी संख्या में स्कूटी, मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रिक कार शामिल है।
बढ़ते ईवी के साथ पुराने वाहनों की चिंता
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में पुराने और उपयोग के लायक नहीं रहने वाले वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी। इसलिए इनके निस्तारण की व्यवस्था पहले से तैयार करना जरूरी है। खासकर ईवी की बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सामान को सुरक्षित तरीके से हटाने और दोबारा इस्तेमाल योग्य सामग्री के पुनर्चक्रण पर ध्यान देने पर विचार हो रहा है।
विभाग पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों की पहचान और उनकी स्थिति का आंकड़ा तैयार करने के साथ यह व्यवस्था तय कर रहा है कि उपयोग के लायक नहीं रहने वाले वाहनों को कहां और किस प्रक्रिया से हटाया जाये। अधिकृत केंद्रों पर वाहनों को जमा कराने और बैटरियों के पुनर्चक्रण की व्यवस्था भी इसी में शामिल होगी।
वाहन पंजीकरण व्यवस्था में कबाड़ घोषित वाहन, कबाड़ के लिए जमा वाहन, कबाड़ किए जाने वाले वाहन और कबाड़ किए जाने के बाद पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किये गये वाहन जैसी श्रेणियां पहले से दर्ज की जाती हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में भी इन श्रेणियों के आधार पर निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसके लिए सभी जिलों से रिपोर्ट भी मंगाई जा रही है।
नये वाहनों में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ी
2026 में इलेक्ट्रिक वाहनों के नये पंजीकरण में तेजी दर्ज की गयी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 55 हजार से अधिक, अगस्त में करीब 50 हजार और सितंबर में 49,600 वाहन पंजीकृत हुए। सितंबर तक राज्य में कुल 5.18 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10% रखने का लक्ष्य
राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति में 2027 तक नये वाहनों के कुल पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। दोपहिया वाहनों में 10 प्रतिशत, तिपहिया में 20 प्रतिशत और चारपहिया में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य है। इसके साथ चार्जिंग केंद्र बढ़ाने और बैटरी के पुनर्चक्रण की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर है।
अब पुराने ईवी हटाने की व्यवस्था पर जोर
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सरकार के सामने अब सिर्फ नये वाहनों को बढ़ावा देने की चुनौती नहीं है। पुराने ईवी को समय पर हटाने, उनकी बैटरी को सुरक्षित तरीके से निपटाने और उपयोगी हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल में लाने की व्यवस्था भी जरूरी हो गयी है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसी को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था का आकलन किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से पहले उनके लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करने पर जोर है।

