
Ranchi : झारखंड की राजनीति में बीता सप्ताह कई अहम घटनाक्रमों के कारण खासा सरगर्म रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन मामले में विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप तय होने से लेकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ झामुमो के आंदोलन, गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव की तैयारियों, एमएमडीआर संशोधन कानून को लेकर भाजपा और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तकरार तथा विपक्षी दलों की आंदोलन की रणनीति तक, कई मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप तय होने का मामला भविष्य में भयंकर सियासी रुख अख्तियार करने वाला है। इसलिए, इस हफ्ते का यह सबसे अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
हेमंत सोरेन के खिलाफ जमीन मामले में आरोप तय
पिछले सप्ताह का सबसे बड़ा घटनाक्रम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन मामले में सामने आया। 30 सितंबर को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय किए। सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। मामले में वे 17वें आरोपी हैं और अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।
हेमंत सोरेन ने आरोपों से इनकार किया है और उन्हें गलत तथा निराधार बताया है। उनके वकील ने अदालत की कार्यवाही और मामले की जांच से जुड़े कई कानूनी सवाल भी उठाए हैं। झारखंड हाईकोर्ट में भी इस मामले से संबंधित याचिका लंबित है। विशेष अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। अगली महत्वपूर्ण कार्यवाही 30 नवंबर को निर्धारित है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि मामला सीधे राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री से जुड़ा है और इसकी न्यायिक प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है।
SIR के खिलाफ JMM का रांची में प्रदर्शन
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर झारखंड की राजनीति में भी पिछले सप्ताह काफी हलचल रही। 30 सितंबर को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने रांची में एसआईआर की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
जेएमएम नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और मतदाताओं को अपने नाम मतदाता सूची में बनाए रखने या शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। पार्टी महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी एसआईआर को लेकर पार्टी की आपत्तियां सामने रखीं।
इस मुद्दे ने झारखंड में सियासी रंग इसलिए भी ले लिया है क्योंकि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन और आगामी चुनावी गतिविधियां राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। जेएमएम के अलावा आरजेडी ने भी एसआईआर और अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाने की बात कही है।
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर श्वेता शर्मा की सक्रियता
दिवंगत मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुई गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पिछले सप्ताह सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में रही। उन्होंने जेएमएम की संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया।
उनकी सक्रियता के बाद जेएमएम की ओर से उन्हें संभावित उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा तेज हुई। जेएमएम की ओर से श्वेता शर्मा का नाम तय होने की बात कही गई, हालांकि उस समय औपचारिक घोषणा है।
दूसरी ओर भाजपा में भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू होने की खबरें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी दूसरे स्थान पर रहे थे। वह सुदिव्य कुमार सोनू से 3838 वोटों से हार गए थे। भाजपा नेता सुरेश साव का भी नाम चर्चा में है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय भी चर्चा में हैं। वह गिरीडीह जिले के रहने वाले हैं और पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र राजधनवार से विधायक भी रह चुके हैं। इसके अलावा, चुन्नू कांत की भी चर्चा हो रही है।
गिरीडीह शहरी इलाके में भाजपा का जनाधार मजबूत है। मगर, पार्टी पीरटांड़ से हार जाती है। इसलिए, भाजपा का थिंकटैंक ऐसे नेता को टिकट देना चाहता है जो पीरटांड़ इलाके में भी वोट बटोर सके।
गिरिडीह सीट पर पिछले चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा था, इसलिए उपचुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
हालांकि, उपचुनाव की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। एसआईआर के बाद 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने का कार्यक्रम है और इसके बाद नवंबर में उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
एमएमडीआर संशोधन कानून पर जेएमएम-कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
झारखंड की राजनीति में खनिज और राजस्व का मुद्दा भी पिछले सप्ताह गर्म रहा। एमएमडीआर यानी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून को लेकर भाजपा और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए।
कांग्रेस और जेएमएम ने संशोधन को झारखंड के राजस्व और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ते हुए इसका विरोध किया। कांग्रेस नेताओं ने इसे मंईयां सम्मान योजना समेत राज्य सरकार की योजनाओं पर असर डालने वाला बताया। जेएमएम ने भी केंद्र से झारखंड के हित और राज्य को मिलने वाले राजस्व से जुड़े सवालों का जवाब मांगा।
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना, निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करना तथा कोयला चोरी एवं अवैध खनन पर अंकुश लगाना है। उन्होंने जेएमएम-कांग्रेस के विरोध पर भी सवाल उठाए।
इस मुद्दे ने एक बार फिर झारखंड में प्राकृतिक संसाधनों, खनिज राजस्व और केंद्र-राज्य संबंधों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
एसआईआर और एमएमडीआर को लेकर विपक्षी दलों ने आंदोलन की रणनीति बनाई
पिछले सप्ताह सिर्फ जेएमएम ही नहीं, बल्कि आरजेडी ने भी एसआईआर और एमएमडीआर संशोधन कानून के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी की। 29 सितंबर को रांची में हुई आरजेडी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने और संगठन को पंचायत स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति पर जोर दिया।
इससे संकेत मिला कि आने वाले दिनों में एसआईआर और एमएमडीआर केवल नीतिगत मुद्दे नहीं रहेंगे, बल्कि झारखंड में राजनीतिक लामबंदी के मुद्दे भी बन सकते हैं। खासकर मतदाता सूची और खनिज नीति जैसे विषयों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी आगे भी तेज रहने की संभावना है।
सप्ताह का सियासी सार
कुल मिलाकर पिछले सप्ताह झारखंड की राजनीति में न्यायालय, चुनाव और खनिज—तीनों मोर्चों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। हेमंत सोरेन के खिलाफ जमीन मामले में आरोप तय होना जहां मुख्यमंत्री के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम रहा, वहीं एसआईआर के खिलाफ जेएमएम का प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया को लेकर सियासी टकराव की नई कड़ी बना।
इसी बीच गिरिडीह उपचुनाव ने जेएमएम और भाजपा दोनों को संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय कर दिया है। जेएमएम से श्वेता शर्मा की सक्रियता के बाद उपचुनाव की संभावित तस्वीर पर चर्चा बढ़ी है। दूसरी तरफ एमएमडीआर संशोधन कानून ने केंद्र और राज्य के बीच खनिज, राजस्व और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस को और धार दी है। यानी पिछले सप्ताह की झारखंड की राजनीति को तीन प्रमुख शब्दों में समेटें तो एसआईआर, हेमंत सोरेन और उपचुनाव सबसे अहम रहे, जबकि एमएमडीआर विवाद ने केंद्र-राज्य की सियासी खींचतान को नया मुद्दा दे दिया।

