
फीचर डेस्क : शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी चंद्रघंटा की आराधना करने से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। माता को शांति, शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप को समर्पित होता है। ऐसे में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा, प्रिय भोग अर्पित करने और मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का आशीर्वाद मिलता है। उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, देवी के इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस और निडरता का भाव बढ़ता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने की शक्ति मिलती है। विवाह में अड़चनें आने पर भी देवी की पूजा को शुभ माना जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां चंद्रघंटा को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी विशेषता के कारण देवी को चंद्रघंटा नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका स्वरूप सौम्य होने के साथ-साथ शक्तिशाली भी है। वह अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजित हैं।
मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह है। उनकी दस भुजाएं हैं और प्रत्येक हाथ में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। देवी के हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और धनुष सहित विभिन्न आयुध बताए गए हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को मानसिक शांति प्राप्त होती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मबल मिलता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में श्रद्धा और भक्ति का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, देवी की आराधना करने से भय, असुरक्षा और मानसिक अशांति से राहत पाने का आशीर्वाद मिलता है। भक्त अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना के साथ माता की पूजा करते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में मां चंद्रघंटा का संबंध शुक्र ग्रह से भी बताया जाता है। इस कारण शुक्र ग्रह से संबंधित दोषों के निवारण की कामना करने वाले श्रद्धालु भी देवी की पूजा करते हैं। इसके साथ ही विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने, पारिवारिक जीवन में खुशहाली बनाए रखने और कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना से मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं।
मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग क्या है?
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां और खीर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दूध से बने पकवान देवी को प्रिय हैं। भक्त पूजा के दौरान खीर या दूध से तैयार मिठाई अर्पित कर माता से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
भोग अर्पित करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जा सकता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा को श्रद्धापूर्वक भोग लगाने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी के सामने दीपक जलाएं और पुष्प, अक्षत, रोली तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद मां चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए उनकी आराधना करें।
पूजा के दौरान मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं। इसके बाद देवी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें। पूजा के अंत में मां चंद्रघंटा की आरती की जा सकती है। पूजा की विधि अलग-अलग पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
मां चंद्रघंटा के मंत्र
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना के लिए देवी के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त श्रद्धा के साथ इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र:
ॐ ऐं श्रीं शक्तयै नमः।
मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
मां चंद्रघंटा की प्रार्थना:
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा, मंत्र जाप और आरती करने से भक्तों को मानसिक शांति, साहस और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। श्रद्धालु देवी की आराधना कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

