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Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,आवेदन की अंतिम तारीख के बाद बने NCL और EWS सर्टिफिकेट पर नियुक्ति से नहीं रोक सकती सरकार

​जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने लेडी सुपरवाइजर भर्ती में NCL और EWS प्रमाणपत्र की तारीख को लेकर जारी शो-कॉज नोटिस रद्द कर दिए। योग्य अभ्यर्थियों को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया गया है।

by Kanchan Kumar
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रांची: ​झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने लेडी सुपरवाइजर की नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर भर्ती के आधिकारिक विज्ञापन में कोई सख्त शर्त नहीं थी, तो सिर्फ इसलिए किसी उम्मीदवार का हक नहीं छीना जा सकता कि उनका नॉन क्रीमी लेयर या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का प्रमाणपत्र आवेदन की आखिरी तारीख के बाद का बना हुआ है।

​यह पूरा विवाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा निकाली गई लेडी सुपरवाइजर विज्ञापन संख्या 14/2023 की बहाली से जुड़ा है, जिसके तहत कुल 444 पदों पर नियुक्तियां होनी थीं। इस प्रक्रिया में फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2023 तय की गई थी।

इसके बाद लिखित परीक्षा हुई, कागजातों की जांच हुई और आखिरकार 14 अगस्त 2025 को रिजल्ट भी जारी कर दिया गया। इसमें कई बेटियां सफल घोषित हुईं।

​चुनौती तब खड़ी हुई जब सफल अभ्यर्थियों ने डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के दौरान अपने नॉन क्रिमी लेयर और ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जमा किए, जो कुछ समय बाद के बने हुए थे। इसे आधार बनाते हुए सरकार ने पिछले दिनों सभी को कारण बताओ नोटिस थमा दिए, जिससे इन बेटियों की नौकरी खतरे में पड़ गई। इस मनमानी कार्रवाई के खिलाफ अभ्यर्थी अदालत की शरण में पहुंचे, जहां उनकी ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने मजबूती से पक्ष रखा।

​जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की हर परत को बारीकी से परखा। कोर्ट ने पाया कि विज्ञापन में यह साफ-साफ लिखा था कि उम्मीदवारों के पास तय तारीख तक शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए, लेकिन एनसीएल या ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट भी उसी तारीख तक का होना अनिवार्य है- ऐसी कोई शर्त विज्ञापन में दूर-दूर तक नहीं थी। सरकार अपनी दलील में पुराने सर्कुलर और पत्रों का हवाला दे रही थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि विभागों के आपसी पत्राचार या नियमों के फेरबदल से अभ्यर्थियों के कानूनी अधिकारों को छीना नहीं जा सकता।

​हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग के सभी तर्कों को दरकिनार करते हुए 25 मई 2026 को जारी किए गए सभी शो-कॉज नोटिस रद्द कर दिए हैं। साथ ही, अदालत ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी योग्य अभ्यर्थियों को उनकी आरक्षित कैटेगरी का लाभ देते हुए अगले छह हफ्तों के भीतर नियुक्ति पत्र सौंपे जाएं। इस फैसले से उन तमाम उम्मीदों को पंख लग गए हैं जो कागजी पेंच फंसने के कारण मायूस हो चुकी थीं।
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