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महालक्ष्मी व्रत,कृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका तीज को लेकर उत्साह,जानें क्या है इसे करने के विधि-विधान

by Rakesh Pandey
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धर्म कर्म डेस्क : रक्षाबंधन के समापन के साथ ही भाद्रपद माह की शुरूआत हो चुकी है। भाद्रपद यानि भादो महिना में पूजा, व्रत, तीज, त्यौहार की दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्मावलंबियों के लिए भाद्रपद महीने बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस माह में कई ऐसे पर्व त्यौहार हैं जिसका लोगों को सालों भर इंजतार रहता है। इस माह में विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान गणेश और शिव पार्वती की पूजा की जाती है।

इस साल भाद्रपद माह में महालक्ष्मी व्रत, कृष्णजन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, हरितालिका तीज, विश्वकर्मा पूजा, ऋषि पंचमी समेत कई पर्व त्योहार हैं जो बेहद खास हैं। विशेष कर कृष्णजन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और हरितालिका तीज हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस माह भगवान विष्णु और गणेश की विधि-विधान के साथ पूजा करने से भक्तों को सुख-शांति और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइये जानते है भाद्रपद माह में पड़ने वाले पर्व, त्योहारों का शुभ मुहूर्त, पूजा विधियों के बारे में।

कृष्णजन्माष्टमी : कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद माह में पड़ने वाले सभी पूजा व पर्व में सबसे महत्वपूर्ण है। कृष्ण जन्माष्टमी में 3 दिन ही शेष बच गये हैं। आगामी 6 सितंबर को देश भर में कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जायेगा। विशेष रूप से देश के उतरी, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में यह प्रमुखता से मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस साल साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 6 सितंबर को पड़ रही है।

भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 3:37 से शुरू होकर 7 सितंबर को शाम 4:14 पर समाप्त होगा। वहीं 6 सितंबर की सुबह 9:21 पर रोहिणी नक्षत्र शुरू होकर 7 सितंबर सुबह 10:25 पर रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो रहा है। वहीं कृष्ण जन्माष्टमी पूजा व शुभ मुहूर्त 6 सितंबर को रात 11:47 बजे से 12:42 बजे तक भगवान की पूजा करना शुभ रहेगा।

महालक्ष्मी व्रत : धन की देवी लक्ष्मी जी को कहा जाता है। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की धर्मपत्नी है। माता लक्ष्मी जी का अवतरण समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। लोग सुख, समृधि, धन दौलत की प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी व्रत की पूजा करते हैं। यह हिंदुओं के महत्वपूर्ण सभी व्रत में महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है और यह व्रत अगले 16 दिनों तक चलता है। इस साल महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है, जो 6 अक्टूबर तक चलेगा। इसका समापन आश्विन माह के कृष्ण अष्टमी को होता है। यह व्रत गणेश चतुर्थी के चार दिन बाद शुरू होता है।

महालक्ष्मी व्रत को राधा अष्टमी व्रत भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री राधा जी का जन्म इसी माह में हुआ था। इस व्रत में विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा होती है। अगर इस व्रत की विधि-विधान की बात किया जाये तो सबसे पहले व्रत के दिन एक मंडप बनाकर लक्ष्मी जी को स्थापित करें। उसके बाद लक्ष्मी जी को स्नान कराये। फिर उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाये। इसके बाद पूजा पात्र में चंदन, अक्षत, फूल, पान, सुपारी, दुर्वा, नारियल, फल के प्रसाद को माता लक्ष्मी को समर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को स्मरण कर व्रती अर्घ्य देकर आरती करें। उसके बाद पूरे विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ पूजा करें। यह व्रत लगातार 16 दिन तक निरंतर चलता रहेगा।

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हरितालिका तीज: पति की दीर्घायु की कामना के लिए हर सुहागिन महिलाएं हरितालिका तीज व्रत पूरे विधि-विधान से करती हैं । यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। हरितालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करके अपने पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं। व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं पूरे 24 घंटे तक उपवास रहकर शाम में सामूहिक रूप से व्रत की कथा सुनती हैं।

इस साल हरितालिका तीज व्रत हिंदू कैलेंडर के अनुसार 18 सितंबर को मनाया जायेगा। हरितालिका तीज व्रत हर साल की तरह इस साल भी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि की शुरुआत 17 सितंबर रविवार को सुबह 11:08 बजे से शुरू हो रही है, वहीं तृतीय तिथि का समापन अगले दिन 18 सितंबर सोमवार को दोपहर 12:39 बजे होगा। हालांकि हरितालिका तीज व्रत 18 सितंबर को मनाया जाएगी।

अगर इस व्रत की शुभ मुहूर्त व पूजा विधि के बारे में बात करें तो पहला मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से 8:43 बजे, दूसरा मुहूर्त सुबह 9:11 बजे से 10:43 बजे, वहीं तीसरा मुहूर्त दोपहर 3:19 बजे से शाम 7:51 तक रहेगा। व्रती इन तीनों मुहूर्तों में अपनी सुविधा अनुसार पूजा कर सकती है। आमतौर पर व्रती शाम के समय सामूहिक रूप से घरों व मंदिरों में पूजा करती है।

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